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हाईकोर्ट का सवाल- पुलिस पार्क में लड़का-लड़की को बैठने नहीं देती, तीन लाख डेराप्रेमी कैसे बैठने दिए

Thu, 19 Dec 2019 02:30 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा 25 अगस्त, 2017 को डेरा मुखी को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद हुए दंगों के मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई। हाईकोर्ट की फुल बेंच ने पूछा कि कैसे इन तीन दिनों तक लाखों डेरा प्रेमियों को पंचकूला में बैठने की इजाजत दी गई। जो पुलिस शाम सात बजे के बाद किसी पार्क में एक लड़का और लड़की को बैठने नहीं देती उसी पुलिस ने तीन दिन और रात तक लाखों डेरा प्रेमियों की क्यों बिना किसी कारण पंचकूला में बैठने दिया।
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बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग कर रहे कोर्ट मित्र सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि यह सीधे तौर पर सरकार की नाकामी है। सरकार पूरे मामले में डेरे के साथ मिलकर चलती नजर आई है, इस पुरे मामले को दो फेज में देखा जाना चाहिए  पहला फेज जब लाखों डेरा प्रेमी पंचकूला में 3 दिन तक बैठे रहे, तब सरकार ने इन्हे हटाने की कोई कोशिश तक नहीं की। दूसरा फेज जब डेरा मुखी को सजा सुना दी गई तब इसी सरकार ने दंगों में शामिल इन्ही डेरा प्रेमियों पर कड़ी कार्रवाई की।

अगर पहले ही सरकार ने ठोस कार्रवाई की जाती तो बाद में हुए नुकसान को रोका जा सकता था। अनुपम गुप्ता ने कहा कि दूसरे चरण फेज में सरकार ने जिम्मेदारी से काम लिया और कड़ी कार्रवाई की चाहे, इस कार्रवाई में 32 लोगों की मौत हुई, लेकिन अगर सरकार बाद में भी कड़ी कार्रवाई नहीं करती तो जानमाल का कहीं ज्यादा नुकसान हो सकता था। बावजूद इसके इस पूरे घटनाक्रम में सरकार और डेरा दोनों जिम्मेदार हैं।
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पंचकूला में जो हुआ, क्या वह सरकार की नाकामी है

दोपहर बाद अनुपम गुप्ता ने करीब दो घंटों तक अपना पक्ष रखा  उसके बाद जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा कि पंचकूला में उन तीन दिनों तक जो कुछ भी हुआ क्या वह सरकार की नाकामी है, यह सब हुआ कैसे इसका सामने आना बेहद जरूरी है। क्या सरकार के पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं थी कि इस तरह की बड़ी घटना हो सकती है।

हाईकोर्ट ने अब इस पर अनुपम गुप्ता से जवाब मांगा है। इस पर हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने कहा कि जब उनका पक्ष पूछा जायेगा तो वह इस पूरे मामले में अपना जवाब देंगे, उनके पास हाईकोर्ट के हर सवाल का जवाब है। हाईकोर्ट ने सुनवाई 8 जनवरी तक स्थगित करते हुए अब अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है।

पंजाब ने कहा, केंद्रीय सुरक्षा बलों की राज्य में तैनाती पर हुआ खर्च
सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने कहा कि इस पुरे मामले में उनकी ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई। एहतियात के तौर पर पंजाब सरकार ने पहले ही सुरक्षा के कड़े बंदोबदस्त कर लिए थे और अब तक इस मामले में सरकार के खिलाफ कोई शिकायत भी नहीं है। जहां तक पंजाब का मामला है तो उनका संबंध सिर्फ इस विषय से हैं की तब राज्यभर में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, जिसका खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ा था।
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