दो लोगों की जान बचाई थी, लेकिन पुलिस वालों ने उसके साथ ही ऐसी हरकत कर दी कि लगता है इंसानियत नाम की चीज ही नहीं बची। मामला हरियाणा के पंचकूला का है। तेज रफ्तार कार की चपेट में आकर घायल दो लोगों की जान बचाने वाले अशोक कुमार (51) के खिलाफ डॉक्टर की शिकायत पर ड्यूटी में बाधा डालने और बदतमीजी करने का मामला दर्ज किया गया। जमानत पर चल रहे अशोक का अब यही सवाल है कि क्या किसी को मौत के मुंह से बचाना गुनाह है।
इस सवाल का जवाब किसी के पास हो न हो, अशोक कुमार ने मामले में प्रधानमंत्री, हरियाणा के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि डॉक्टर के पति चंडीगढ़ प्रशासन में एक अधिकारी हैं, जिनके रसूख का इस्तेमाल कर उन पर झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई है। दोनों घायलों को आठ मार्च की रात करीब 12.30 बजे सिविल अस्पताल पहुंचाया गया था।
मौके पर मौजूद अस्पताल कर्मियों से अशोक कुमार ने एक अन्य मरीज के बारे में पूछताछ की, जो लहूलुहान हाल में जमीन पर पड़ा हुआ था। उन्होंने उक्त मरीज को भी तुरंत इलाज देने को कहा। इस दौरान नीचे मौजूद व्यक्ति की जेब से काफी रुपये गिर गए, जिसे देखकर अशोक कुमार ने रुपये संभालने को कहा। इस दौरान अशोक मोबाइल से विडियो भी बना रहे थे, जिस पर अस्पताल कर्मी ने ऐतराज जताया। थोड़ी देर बाद मौके पर पहुंची डॉक्टर ने इस मामले की पुलिस में लिखित शिकायत दे दी, जिसमें अशोक कुमार पर काम में बाधा डालने और बदतमीजी का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।