हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से जुलाई 2013 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन रहते हुए पंचकूला में आवंटित किए गए 14 औद्योगिक प्लॉटों के मामले की जांच सरकार ने विजिलेंस को सौंप दी है।
मंगलवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में यह जानकारी हरियाणा सरकार की ओर से दी गई। साथ ही कहा गया कि जांच आगामी डेढ़ महीने में मुकम्मल कर ली जाएगी। इस जवाब के साथ हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है।
पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार अगली सुनवाई तक बताए कि पंचकूला के प्लॉटों की जांच पर क्या फैसला लिया है। रोहतक व भिवानी में ऐसे ही प्लॉटों की जांच विजिलेंस कर रहा है। पिछली सुनवाई पर संकेत दिया गया था कि यदि सरकार कोई फैसला नहीं लेती तो पंचकूला के प्लॉटों के आवंटन प्रकरण की जांच भी विजिलेंस के हवाले की जा सकती है।
हालांकि मंगलवार को सरकार के वकील ने कहा कि जांच विजिलेंस के हवाले कर दी गई है। डेढ़ महीने में जांच मुकम्मल हो जाएगी। अब हाईकोर्ट में प्रकरण की अगली सुनवाई सात अक्तूबर को होगी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्लाट आवंटन में अनियमितता बरतते हुए हुड्डा ने अपनों को तरजीह दी।
याचिका पंचकूला के लेफ्टिनेंट कर्नल एसके जैन ने दायर की थी। याचिका में अलॉटमेंट रद्द करने की मांग की गई। आरोप लगाया था कि जिन्हें प्लॉट मिले, उनमें हुड्डा के दिश्तेदार व पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल के अलावा उनके रिश्तेदार ओपी दहिया, हुड्डा परिवार की नजदीकी रहीं रेणू हुड्डा, मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे बीआर बेरी की पुत्रवधु मोना बेरी, मुख्यमंत्री के सचिव रहे राम सिंह के बेटे प्रदीप कुमार, थानेसर के पूर्व विधायक रमेश गुप्ता के बेटे अमन गुप्ता, हरियाणा एजी कार्यालय में सीनियर डीएजी सुनील कत्याल के पारिवारिक सदस्य कंवरप्रीत संधू, एडिशनल एजी प्रभजीत की पत्नी मनजोत कौर और सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल नरेंद्र हुड़्डा व अन्य नजदीकी शामिल हैं।