चंडीगढ़। ट्राइसिटी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) दिल्ली-एनसीआर के करीब पहुंच गया है। बुधवार को जहां दिल्ली का एक्यूआई 334 रहा, वहीं पंचकूला में शाम 5 बजे 330 और चंडीगढ़ में शाम 7 बजे का लेवल 282 रिकॉर्ड किया गया। ट्राइसिटी में हवा बहुत खराब श्रेणी में रही। चंडीगढ़ के मुकाबले पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में एक्यूआई बेहतर देखा गया, जहां वायु प्रदूषण स्तर अक्सर ज्यादा रहता है। पंजाब के लुधियाना में एक्यूआई 138, पटियाला में 134, अमृतसर में 107, बठिंडा में 147 और जालंधर में 167 रहा।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सुधीर मोहन ने बताया कि शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का बुधवार का आंकड़ा बेहद ज्यादा दर्ज किया गया है। पंचकूला के मौजूदा पीएम 2.5 स्तरों के आधार पर यहां की हवा में सांस लेना हर दिन 9.9 सिगरेट पीने के बराबर है। यानी एक हफ्ते में लगभग 69.3 सिगरेट और पूरे महीने में 306.9 सिगरेट का असर शरीर पर पड़ रहा है।
शहर में सेक्टर-22 सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित इलाका
चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार शहर में लगाए गए एक्यूआई स्टेशन की अगर बात करें तो सेक्टर-22 का इलाका सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित दर्ज किया गया। सेक्टर-22 का एक्यूआई लेवल 308 दर्ज किया गया। इसी तरह सेक्टर-53 का एक्यूआई 256 दर्ज किया गया। चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति ने वॉटर स्प्रिंकलर मशीन को शहर में वायु प्रदूषण के असर को कम करने के लिए साफ पानी के छिड़काव के लिए निर्देश जारी किए हैं। खासकर सेक्टर-22 के इलाके में जहां एक्यूआई लेवल लगातार ज्यादा बना हुआ है।
सावधान रहें.... आंखों में जलन, गले में खराब और सांस लेने में हो सकती है तकलीफ
सिविल अस्पताल सेक्टर-6 के प्रिंसिपल मेडिकल आफिसर डॉ. आरएस चौहान ने बताया कि एक्यूआईर् 300 से अधिक होने पर आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और खुले में व्यायाम से बचने की अपील की है।
एक्यूआई 300 पार होने पर बचने के उपाय
-अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाएं।
-सुबह-शाम की सैर, जॉगिंग या व्यायाम खुले में न करें।
-मास्क का इस्तेमाल करें
-घर के अंदर की हवा साफ रखें
-खिड़की-दरवाजे बंद रखें, खासकर पीक प्रदूषण समय में।
-बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान दें
-बच्चों को आउटडोर खेलों से रोकें।
बुजुर्गों और अस्थमा/सीओपीडी मरीजों को नियमित दवा लेते रहें।
-आंखों में जलन हो तो साफ पानी से धोएं।