पत्र में खासतौर पर उन शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें गैरकानूनी तरीके से हिस्सेदारी में बांटकर उनकी मिलकियत बदल दी गई है या चकबंदी विभाग द्वारा हेराफेरी से जमीनों के मालिक बदलकर प्राइवेट लोगों को मालिक बना दिया गया। सरकार ने अपने आदेश में शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का इंतकाल ग्राम पंचायत के नाम लिखने के बाद इन जमीनों का कब्जा छुड़ाने की बात भी कही है। इस आदेश से पंजाब भर में ऐसे हजारों लोग प्रभावित होंगे जिन्होंने इस प्रकार की जमीन की मिलकियत अपने नाम करवा रखी है और इस सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहरा दिया है।
चंडीगढ़ और बड़े शहर में रसूखदारों ने बना लिए फार्म हाउस
ग्राम विकास एवं पंचायत विभाग के अनुसार, इस मामले में दो साल पहले कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि प्रदेश के सभी बड़े शहरों और राजधानी चंडीगढ़ के आसपास पंजाब के गांवों की जमीनों पर आम लोगों के अलावा रसूखदारों ने भी आलीशान कोठियां और फार्म हाउस बना लिए हैं। इन सभी कब्जाधारियों पर अब अनिश्चितता की तलवार लटक गई है क्योंकि यह जमीनें उन्हे खाली करनी होंगी।