25 साल बाद वतन लौटे पश्चिम बंगाल के जिला हुगली निवासी मुशर्रफ अली का कहना है कि वह अटारी सीमा से पैदल ही पाकिस्तान चले गए थे। पाकिस्तान रेंजर ने उन्हें पकड़ लिया था और टॉर्चर किया गया। अदालत ने उसे पांच साल की कैद सुनाई थी लेकिन उसे 25 साल बाद रिहा किया गया है।
इस दौरान उसे पाकिस्तान के हैदराबाद और कराची की जेलों में रखा गया था। जब वह पाकिस्तान गए थे तब उनकी उम्र 40 वर्ष की थी, अब वह 65 वर्ष के हो चुके हैं। उनकी शादी नहीं हुई है। पाकिस्तान क्यों गए, क्या किसी सरकारी एजेंसी ने भेजा था, इन सवालों के जवाब में अली चुप रहे।
अवैध रूप से ईरान जाने की मिली सजा
कोलकाता निवासी कौसर ने बताया कि वह छह साल पहले रोजी-रोटी के लिए दुबई गया था। वहां पर जिस कंपनी में मजदूरी करता था, वह बंद होने के बाद वहां काम करने वाले बांग्लादेशी व पाकिस्तानियों के साथ वह अवैध रूप से ईरान चला गया था। ईरान की पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत द्वारा दी गई सजा पूरी करने के बाद वहां की पुलिस ने सभी को ईरान की सीमा से सटे बलूचिस्तान में छोड़ दिया था जहां पाकिस्तान रेंजर्स ने उनको गिरफ्तार कर लिया था। पाकिस्तान की लांडी जेल में चार साल की सजा काटने के बाद वह रिहा हुआ है।
गुजरात के राजकोट के सुहेल ने बताया कि कराची में उनका ननिहाल है। उनके चाचा भी वहीं रहते हैं। वह पाकिस्तान में बसने के लिए गया था। कराची में जब वह अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहा था, इसी दौरान आस-पड़ोस में रहने वाली लड़कियों के साथ उनकी दोस्ती हो गई।
जब चाचा को इसकी भनक लगी तो उन्होंने पुलिस को इत्तला कर उसे गिरफ्तार करवा दिया। वह चार वर्ष के बाद घर लौट रहा है। अब वह कभी पाकिस्तान नहीं जाएगा। राजकोट में ही रोजी-रोटी कमाएगा।