उत्तर भारत में चल रही हवाओं में बढ़ रही स्मॉग को लेकर पाकिस्तान की ओर उंगली उठनी शुरू हो गई है। नासा की वेबसाइट सेटेलाइट इमेज यही इशारा करती है।
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चंडीगढ़ के पीजीआई स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डॉ रविंद्र खैवाल की मानें तो 'हवाओं के रूख को देखें तो इस्लामाबाद से आ रही हवाओं की क्वॉलिटी इतनी ज्यादा खराब है कि उनकी वजह से हमारा वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
नासा की तस्वीरें दिखाती हैं कि हमारे पंजाब की तरफ काफी मात्रा में क्रॉप बर्निंग हुई है। इसलिए हम यह नहीं कह रहे कि सारा स्मॉग पाकिस्तान की तरफ से आया है, लेकिन उनकी तरफ से चल रही खराब हवा भी हमारी मुश्किलें बढ़ा रही है।'
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पाकिस्तान से आ रही हवा स्मॉग का कारण
smog
डॉ खैवाल कहते हैं, 'हमारी छानबीन यह बताती है कि स्मॉग वाली हवा पाकिस्तान से शुरू होकर भारत की तरफ आ रही है। वो लोग हमारे यहां प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं ना की हम उनके यहां।' भारतीय मौसम विभाग के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मौजूदा समय में हवा की दिशा उत्तर पश्चिम है जो पाकिस्तान से भारत की ओर बह रही है।
इन्वायरमेंट हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रविद्रा खैवाल ने बताया कि उनकी टीम ने 25 अक्तूबर से लेकर चार नवंबर तक सेटेलाइट इमेज जेनरेट की। सभी इमेज में साफ देखा गया है कि पंजाब के इलाकों में ही सबसे ज्यादा पराली जलाई जा रही है, जबकि इस बार हरियाणा में काफी कम है।
पंजाब में धड़ल्ले से, हरियाणा में ब्रेक
दिल्ली में जहरीली धुंध
- फोटो : जी पॉल/अमर उजाला
बताया जा रहा है कि इस बार हरियाणा में काफी सख्ती बरती गई है। करीब 1406 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। लगभग 14 लाख का जुर्माना भी वसूला जा चुका है। इसी का नतीजा है कि हरियाणा में सिर्फ एक दो इलाकों में पराली जलाने की तस्वीर सामने आई है।
खास तौर पर सोनीपत से लेकर अंबाला तक पूरी तरह से साफ दिख रही है। पंजाब में कार्रवाई न के बराबर की गई है। इसी वजह से पंजाब में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। संभव है कि चुनावी साल होने के कारण कार्रवाई धीमे स्तर पर हो रही है।
पंजाब में पीएम 2.5 का स्तर तय लिमिट से ज्यादा
पराली जलाए जाने से पंजाब में पीएम 2.5 का स्तर तय सीमा से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। कई इलाकों में पीएम 2.5 का स्तर 180 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 120 से ज्यादा का स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। दिल्ली व एनसीआर के इलाकों में पीएम 2.5 का स्तर 700 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूब दर्ज किया जा चुका है।
पर्यावरण वैज्ञानिक मानते हैं कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली का ज्यादा रोल नहीं है। प्रदूषण का एक कारण तो हो सकता है, लेकिन इतना ज्यादा नहीं। दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण मौसम की गतिविधियां, कचरा जलाने से उठने वाला धुआं, निर्माण कार्य, वाहनों से निकलने वाला धुआं और आसपास के इलाकों की इंडस्ट्री का धुआं हो सकता है।
ये तस्वीरे पिछले सात से आठ दिनों की है। इसमें हमने देखा है कि पंजाब के इलाकों में ज्यादा पराली जलाई जा रही हैं, जबकि हरियाणा में कम। हो सकता है कि हरियाणा में पराली जलाने का काम पहले ही समाप्त किया जा चुका हो। पाकिस्तान के भी कुछ इलाकों में पराली जलाई जा रही हैं। दिल्ली के प्रदूषण में इसका ज्यादा रोल नहीं है।
- रविंद्रा खैवाल, एसोसिएट प्रोफेसर इन्वायरमेंट हेल्थ पीजीआई