साथ ही करतारपुर साहिब की पावन धरती पर माथा टेकने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का ब्लू प्रिंट भी मांगा था। कमेटी भंग होने के बाद इस बात की संभावना है कि दो अप्रैल की स्थगित बैठक पर भारत सकारात्मक रवैया अपना सकता है।
पाकिस्तान खालिस्तानी मूवमेंट को हवा देने के प्रयास में
पाक सरकार द्वारा गठित की गई कमेटी में पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष बिशन सिंह, कुलजीत सिंह, मनिंदर सिंह, मोहिंदर पाल सिंह, साहिब सिंह, संतोख सिंह, शमशेर सिंह, तारु सिंह, भगत सिंह और गोपाल चावला को शामिल किया था। कमेटी में चावला समेत कई सदस्य खालिस्तान समर्थक थे। इसमें न तो पाकिस्तान औकाफ बोर्ड के किसी सदस्य को शामिल किया गया, न ही किसी सरकारी अधिकारी को।
इस कमेटी की आड़ में पाकिस्तान श्री करतारपुर साहिब की पावन भूमि से खालिस्तानी मूवमेंट को हवा देने की कोशिश में था। यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले जत्थों को खालिस्तानी साहित्य बांटना और विदेश में शरण लिए खालिस्तानी नेताओं के साथ मिल कर भारत विरोधी भाषण करवाने के पीछे गोपाल चावला ही है। पाकिस्तान सरकार ने चावला को पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का महासचिव भी नियुक्त किया हुआ है।
इमरान खान ने गोपाल चावला के साथ की थी बैठक
भारत-पाकिस्तान के बीच 14 मार्च को अटारी सीमा पर करतारपुर कॉरिडोर को लेकर जो बैठक हुई थी, उससे कुछ घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गोपाल चावला के साथ एक बैठक भी की थी।
इमरान खान ने 28 नवंबर को करतारपुर साहिब कॉरिडोर का नींव पत्थर रखा था, तब गोपाल चावला की नवजोत सिद्धू व एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल के साथ फोटो भी वायरल हुई थी। उन्हीं दिनों गोपाल चावला ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें उसने खालिस्तानी आतंकियों को हर संभव समर्थन देने की घोषणा की थी।