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कोरोनाकाल में ऑनलाइन जुड़े पाक मनोविज्ञानी, बोले- गेस्ट लेक्चर हों

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PU
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चंडीगढ़। पाकिस्तान के मनोविज्ञानियों को मनोविज्ञान की कांफ्रेंस में आने के लिए न्यौता 2010 से दिया जा रहा है लेकिन वीजा की बाधाओं के कारण वे भारत नहीं पहुंच पा रहे थे। कोरोना के जरिए उन्हें ऑनलाइन मंच पर बोलने का अवसर मिला। कार्यक्रम था, नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिकल साइंस की ओर से आयोजित कांफ्रेंस का।
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दो दिन चली इस कांफ्रेंस में 14 से अधिक देशों के मनोविज्ञानियों ने हिस्सा लिया। साथ ही पाकिस्तान के भी 20 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि राजनीति उन्हें ज्ञान बांटने नहीं दे रही है। दोनों देशों के मनोवैज्ञानिक एक-दूसरे देशों में जाकर ज्ञान बांटना चाहते हैं, लेकिन वीजा ही नहीं दिया जा रहा। इस बार कोरोना के कारण यह कांफ्रेंस ऑनलाइन होने से यह अवसर मिल पाया।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिकल साइंस के अध्यक्ष एवं पीयू के मनोविज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. रोशन लाल की ओर से यह कांफ्रेंस आयोजित की गई थी। इस कांफ्रेंस में 200 से अधिक रिसर्च स्कॉलर, शिक्षकों ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए जो अधिकांश कोरोना पर थे। पाकिस्तान स्थित पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर के शिक्षकों ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ का केंद्र लाहौर में ही रहा है। यहीं से वह विश्वविद्यालय वहां पहुंचा। दोनों विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक आपस में ज्ञान बांटना चाहते हैं। इस प्रस्ताव को आगे तक पहुंचाया जाए। उन्हें एक-दूसरे विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का अवसर दिया जाए ताकि विद्यार्थियों को और भी नई जानकारियां मिल सकें। इस कांफ्रेंस में 600 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। अध्यक्ष डॉ. रोशन लाल ने सभी का आभार जताया।
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चंडीगढ़ के बच्चों को सिखलाई देंगे अमेरिका के शिक्षाविद
कांफ्रेंस में अमेरिका के मनोविज्ञानियों ने ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स पर बात की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान व बांग्लादेश में हैप्पीनेस इंडिया से अधिक है। यह डाटा इसका साक्ष्य है। इसका प्रमुख कारण यह है कि भारत में एक-दूसरे को देखकर लोग जलन महसूस करते हैं। परिवारों के झगड़ों को दबाकर रखते हैं। किसी से साझा नहीं करते। इससे तनाव बढ़ता जाता है और खुशी कम होती जाती है। यदि इमोशनल रूप से लोग मजबूत हों तो किसी भी बाधा को वे हंसी-खुशी टाल सकते हैं। इसके लिए इमोशनल मजबूती की जरूरी है। यह स्कूली बच्चों को ट्रेनिंग के दौरान बताई जानी चाहिए। अमेरिका इसमें मदद करेगा। विशाखापटनम के कुछ स्कूलों में भावनात्मक बुद्धि (इमोशनल इंटेलिजेंस) की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। अब चंडीगढ़ में भी शुरू करने की इच्छा जताई है। अमेरिका के ऑरिगन स्टेट में भी यह ट्रेनिंग बड़े स्तर पर चल रही है। उन्होंने कहा कि मानसिक व भावनात्मक मजबूती तभी आ सकती है जब मनोवैैज्ञानिक दृष्टिकोण से उन्हें समर्थन किया जाए।
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