भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को मधुर बनाने में अब पंजाब के किसान भी अहम भूमिका निभाएंगे। यह सपना प्रोग्रेसिव पंजाब एग्रीकल्चर समिट के माध्यम से सच होने जा रहा है।
समिट में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान पंजाब के गवर्नर मोहम्मद सरवर अपनी टीम सहित पहुंचे। इस दौरान जहां उनकी टीम ने समिट के विभिन्न तकनीकी सेशनों को अटेंड किया। वहीं, उन्होंने खुद विभिन्न कंपनियों द्वारा लगाई गई खेती संबंधी मशीनरी का जाजया लिया।
सुबह पाक गवर्नर मोहम्मद सरवर मिनार के अंदर चल रहे टेक्निकल सेशन में शामिल हुए। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से उनको सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनी का जायजा लिया।
उन्होंने बताया कि वैसे तो पाकिस्तान पंजाब की स्थिति भी काफी बेहतर नहीं है। हिंदोस्तान पंजाब के किसान इस मामले में हर क्षेत्र में आगे हैं। उनके पास बढ़िया मशीनरी से लेकर माहिर तक हैं।
उन्होंने बताया कि समिट में उनकी सात मेंबर टीम यहां से खेती की तकनीक सीखेंगी। उन्होंने कहा कि कृषि माहिरों के ऐसे प्रोग्राम होते रहने चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता को लेकर वहां की सरकार काफी गंभीर है। भारत में नई सरकार गठित होने से इस दिशा में तेजी आएगी। वीजा प्रॉब्लम को भी खत्म करने दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
पशुओं की नस्ल सुधारने में पाकिस्तान आगे
मुख्यमंत्री बादल ने कहा पाकिस्तान ने गाय, भैंसों और बकरियों और बकरियों के नस्ल सुधार में काफी अच्छा काम किया है। वहां की साहीवाल नस्ल की गायों, नीली राबी नस्ल और भैंसों और बीटल नसल की बकरियां पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि पशुओं की देशी नस्लों के सुधार के लिए दोनों राज्यों में बेहतरीन नस्ली जीव तत्वों का आदान-प्रदान करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तो को मधुर बनाने में काफी फायदेमंद साबित होगा।
जल्दी एक डेलीगेशन जाएगा पाकिस्तान
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि कपास, मक्की और नींबू जाति के फलों की काश्त में प्रयोग की जा रही तक नीकों में पाकिस्तान का जवाब नहीं हैं। जल्दी ही वह किसानों और खेती विशेषज्ञों पर आधारित एक शिष्टमण्डल लेकर पाकिस्तान जाएंगे, ताकि वहां से वह कुछ सीख सकें।
ट्रैक्टर आया पसंद, परंतु टैक्स ने उड़ाए होश
कृषि संबंधी औजारों की प्रदर्शनी देखने के लिए जैसे ही पाकिस्तान पंजाब के गवर्नर अपने माहिरों सहित सोनालिका के स्टॉल पर पहुंचे तो उन्हें वहां पर डीआई-60 आरएक्स सुपर ट्रैक्टर पसंद आ गया है। इसकी कीमत पांच लाख रुपये थी।
उन्होंने पूछा कि अगर इसे पाकिस्तान ले जाना हो तो कितना खर्च आएगा। इस पर कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि उन्हें सात लाख चुकाने होंगे। जिस पर उन्होंने कहा कि फिर मजा नहीं आएगा। इसके बाद स्वराज के छोटे ट्रैक्टर को चलाने का आनंद उठाया।