पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। 2008 में उसे दस साल की सजा और आठ हजार रुपये जुर्माना लगाया। मार्च में उसकी सजा पूरी हो गई थी। दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों द्वारा दस्तावेज में देरी के कारण वारसी नौ महीने तक भोपाल पुलिस के डिटेन सेंटर में रहा।
अटारी सीमा पर वारसी ने कहा कि भोपाल की पुलिस ने उसके साथ अच्छा व्यवहार किया। उसने अपने बेटों और पत्नी के बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि पाकिस्तान लौटने के बाद वह अपनी पत्नी और दो बच्चों को पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा।
वतन लौटना सुकून देने वाला है, लेकिन दुख है कि परिवार यहां छूट गया। मध्य प्रदेश पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच वारसी को अटारी सीमा पर लेकर आई। रिहाई के दस्तावेजों की जांच के बाद सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने वारसी को पाकिस्तान रेंजर्स को सौंप दिया।