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पदमश्री विजेता ने दिया जीत का मंत्र, बताई ऐसी बातें जो काम आएंगी आपके

Sat, 22 Oct 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़(सुमित सिंह श्योराण )
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पदमश्री विजेता शेखर सेन
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पदमश्री शेखर सेन ने कहा कि ‘हिंदुस्तान में सबसे बड़ी दिक्कत है कि यहां लोग जरूरत से अधिक जानते हैं। लेकिन कई बार अधिक उजाला भी इंसान को अंधा कर देता है। सफलता का स्वाद तभी महसूस किया जा सकता है जब उसने असफलता का दर्द झेला हो। यही सफलता का असल मूल मंत्र है।’ 
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देश विदेश में कबीर और तुलसीदास जैसे नाटकों को  पेश करने वाले पदमश्री  शेखर सेन ने पंजाब यूनिवर्सिटी में युवाओं को जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं से रूबरू करवाया। लेखक, गीतकार, संगीतकार और अभिनेता शेखर सेन शुक्रवार दोपहर बाद पीयू की ओर से आयोजित क्लोकियम सीरीज के तहत कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे ।

 शेखर सेन ने ‘मेरी कलायात्रा’ शीर्षक पर कहा कि जिस देश या समाज में कल्चर की अनदेखी होती है, उसकी हालत पाकिस्तान और ईरान जैसे देशों जैसी होती है। जो अपनी हस्ती को बचाने के लिए भी संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि कल्चर से दूर होते पाकिस्तान में आज एक भी नया क्लासिकल गायक नहीं उभरा है। उन्होंने कहा कि कल्चर की अनदेखी वल्चर  को बुलावा देने जैसी होती है।    
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शेखर ने मुंबई के मुश्किलों भरे सफर को युवाओं के साथ सांझा किया। कभी मुंबई के गुरुद्वारे में गीत सुनाकर जीवन बसर करने वाले शेखर ने युवाओं को कहा कि खुद की ताकत को पहचानो और खुद की पहचान बनो। देश दुनिया में 2700 से अधिक नाटकों की प्रस्तुति दे चुके शेखर ने कहा कि हर इंसान में अलग खूबी होती है। बस उसे खुद को धातु की तरह पहचानने की जरूरत है। वह खुद को तांबा धातु की कैटेगरी में मानते हैं। अगर एक दिन भी तांबे के बर्तन नहीं धोए तो वह काला पड़ जाता है, लेकिन उसे रोज धोया जाए तो सोने से भी ज्यादा चमकता है। इस फार्मूले को वह अपने जीवन में अपनाते हैं। 

खास अंदाज में शेखर ने युवाओं को खुद की प्रतिभा को निखारने के कई मंत्र  दिए। उन्होंने अपने जीवन के कड़े दौर की यादों को साझा किया। नाटक के निर्देशन के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो पत्नी के गहनों का भी सौदा करना पड़ गया। 
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अधिक उजाला भी इंसान को अंधा कर देता है: पदमश्री शेखर सेन

पदमश्री विजेता शेखर सेन
शेखर ने कहा कि ‘जिंदगी की लड़ाई कैसे जीती जाए, ऐसा कॉलेज में कोई सब्जेक्ट नहीं होता। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई से जिंदगी का सब्जेक्ट बिल्कुल अलग होता है। स्कूल कॉलेज के इम्तहान में पहले पढ़ना पड़ता है। लेकिन जिंदगी के इम्तहान में पहले परीक्षा देनी होती है और फिर सीखा जाता है।’ उन्होंने युवाओं से कहा ‘हमेशा खूबियों को पहचान उन्हें तराशने की कोशिश करो।’   

सेन ने कहा कि ‘वह हर साल 400 से अधिक फिल्में देखते हैं।’ कमल हसन को बेहतरीन एक्टर मानने वाले सेन ने मौजूदा संगीत पर कमेंट करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ‘मेरा मकसद थिएटर को जिंदा रखना है, जो मैं करने की कोशिश कर रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि देश में सुरक्षा को लेकर आमिर खान के बयान को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम में यह वाकया हुआ वह मौजूद थे। कार्यक्रम में पीयू कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर, प्रो.नीरा ग्रोवर भी मौजूद थे। प्रो.अर्चना आर सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। 
  
 पीयू कैंपस में शेखर सेन देंगे प्रस्तुति 
पंजाब यूनिवर्सिटी में ऑडियंस की भागेदारी से अभिभूत होकर शेखर सेन ने पंजाब यूनिवर्सिटी में दोबारा आने का वादा किया। विदाई के समय उन्होंने वीसी अरुण कुमार ग्रोवर से धीरे से कहा कि ‘आप जब भी बुलाएंगे हम हाजिर हो जाएंगे।’ जानकारी अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी में इस साल संभावित स्पेशल दीक्षांत समारोह में शेखर सेन को कबीर या तुलसीदास मोनो एक्ट के लिए निमंत्रित किया जाएगा। पीयू में पहली बार शेखर मोनो एक्ट की प्रस्तुति देंगे। 
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