‘जल प्रबंधन चुनौतियां और कार्यनीतियां’ विषय पर आयोजित सेमीनार
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 के मद्देनजर पार्टियों के बीच मचे घमासान पर पद्मश्री अवार्ड विजेता संत सींचेवाल ने बड़ा बयान दिया है। सींचेवाल ने विधान सभा 2017 में सभी सियासी पार्टियों के मुद्दे में शुद्ध पानी व पर्यावरण को शामिल न करने पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा नेता कुर्सी के लिए झूठ बोलते हैं।
समय आ गया है कि पंजाब के मुख्य मुद्दों में शामिल शुद्ध पानी व पर्यावरण को लेकर हम सभी सचेत हो। संत सीचेवाल मंगलवार को अमृतसर (गुरू नगरी) में 'पानी बचाने, पेड़ लगाने' की मुहिम को 2017 विधान सभा चुनावों से जोड़कर शुरू करने पहुंचे थे। अमर उजाला ने उनसे खास बातचीत की। संत सीचेवाल ने कहा कानून कहता है कि अगर दूषित पानी पीने से किसी की मौत होती है तो जिले का डिप्टी कमिश्नर व मेयर जिम्मेदार होते हैं।
दुख की बात है कि यह लोग भी सियासी कठपुतली बने रहते हैं। सरकारें कुर्सी देखती हैं, समाज को नहीं। मैं कहता हूं की बीते दस सालों की सरकार ने पंजाब में विकास तो किया है लेकिन पानी के विनाश पर चुप्पी साधे रहे हैं। संत सीचेवाल ने ग्रीन पंजाब व क्लीन पंजाब के पोस्टर के तले प्रेस कांफ्रेंस की। पोस्टर में 1974 एक्ट को लागू करना और पंजाब को शुद्ध पर्यावरण देना मुख्य एजेंडा था।
एक्ट तो बन जाते पर सरकार लागू नहीं करती
‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : amarujala
संत सीचेवाल कहते हैं कि पानी व पर्यावरण बचाने के लिए ठोस कानून 1974 एक्ट बना है लेकिन पंजाब की सरकारें उसे लागू नहीं करती। एक्ट के मुताबिक जमीन से उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक संपदा को सृजन न करने वालों पर क्रिमिनल केस का विधान है, लेकिन यह एक्ट अब तक लागू ही नही हुआ।
उन्होंने कहा कि साफ पानी, साफ हवा लेने का हमारा कुदरती अधिकार है, इस अधिकार पर कोई टैक्स तो लगा सकता है लेकिन छीन नही सकता। उन्होंने सभी संतों से अपील करते हुए कहा कि पंजाब की धरती पर पानी बचाने के लिए पौधे लगाएं। कुदरती पानी को बचाएं। गंदे पानी को दोबारा प्रयोग में (खेती के लिए) उस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से गुजारा जाए।
उन्होंने कहा कि जो प्रत्याशी पानी व पर्यावरण बचाने की बात करे, वोट उसे ही दो। जो शुद्ध पानी देने का दावा करे, वोट उसे दो। संत सीचेवाल ने सभी राजनैतिक पार्टियों से अपील करते हुए कहा कि कुर्सी के साथ-साथ समाज की सोचें।