चंडीगढ़। 10 दिन में गाड़ी की ओनरशिप ट्रांसफर नहीं करने पर चंडीगढ़ के सेवा का अधिकार आयोग ने सेक्टर-17 स्थित रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के ब्रांच इंचार्ज पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि ब्रांच इंचार्ज के अगले महीने के वेतन से काटे जाएंगे। यह आदेश सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त अरुण कुमार ने मंगलवार को जारी किए हैं।
शिकायतकर्ता पूनम जामवाल ने आरएलए के ब्रांच इंचार्ज के खिलाफ 23 अक्तूबर को आयोग में शिकायत दी। कहा कि तीन अगस्त को उन्होंने गाड़ी की ओनरशिप के ट्रांसफर के लिए आवेदन किया। परिवहन सेवा पोर्टल पर उन्होंने सभी मांगे हुए दस्तावेजों को अपलोड कर दिया। 14 अगस्त को उन्होंने देखा कि आरएलए ने सत्यापन की प्रक्रिया को भी शुरू नहीं किया। इसका स्क्रीनशॉट भी अपनी शिकायत के साथ लगाया। उन्होंने लिखा कि आवेदन की फीस भी जमा करा दी थी, जिसकी रसीद भी शिकायत के साथ लगाई। कहा कि चंडीगढ़ सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत 10 दिन में उन्हें यह सेवा दी जानी चाहिए थी लेकिन आरएलए के अधिकारी ऐसा करने में विफल रहे। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग के मुख्य आयुक्त अरुण कुमार ने 26 अक्तूबर को आरएलए के ब्रांच इंचार्ज को शोकॉज नोटिस जारी किया और 9 नवंबर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया। इस दौरान उन्हें सभी रिकॉर्ड भी साथ लाने के निर्देश दिए।
58 दिन तक आरएलए ने आवेदन पर नहीं दिया ध्यान
नौ नवंबर को शिकायतकर्ता और ब्रांच इंचार्ज जोस जॉर्ज उपस्थित रहे। अधिकारी ने लिखित में शोकॉज नोटिस का जवाब दिया, जिसे रिकॉर्ड पर रखा गया। उन्होंने जवाब में खुद माना कि आवेदन का सत्यापन 23 अक्तूबर को शुरू किया गया। इसके बाद कई आपत्तियां जताई गईं। आठ नवंबर तक उन आपत्तियां को दूर नहीं किया गया है, जिसकी वजह से उनका काम नहीं हुआ है। हालांकि, आयोग ने इस दलील को नहीं माना। कहा कि 58 दिन तक आरएलए ने आवेदन पर ध्यान नहीं दिया। शिकायतकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरएलए में अधिकारियों की आदत है कि वह बिना कोई कारण बताए हफ्तों तक फाइल पर बैठे रहते हैं। आयोग ने माना कि यह बड़ी लापरवाही है।
ब्रांच इंचार्ज के वेतन से डीसी काटेंगे 10 हजार रुपये, आयोग को भेजी जाएगी कॉपी
चंडीगढ़ सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत तय किए गए समय के अंदर काम को पूरा नहीं करने पर ब्रांच इंचार्ज जोस जॉर्ज पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। मुख्य आयुक्त ने डीसी विनय प्रताप सिंह को आदेश दिए कि वह ब्रांच इंचार्ज के अगले महीने के वेतन से 10 हजार रुपये काटें और उसकी एक कॉपी चंडीगढ़ सेवा का अधिकार आयोग को भी भेजा जाए। यह आदेश आयोग के मुख्य आयुक्त अरुण कुमार की तरफ से जारी हुए हैं। बता दें कि अरुण कुमार ने हाल ही में मुख्य आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली है। वह एक सेवानिवृत आईएएस अधिकारी हैं।