प्रदेश में रोडवेज की बसों का संचालन गड़बड़ाता जा रहा है। अधिकतर डिपो से लंबे रूटों पर बसें नहीं चल रही हैं। इस कारण यात्रियों को खासी परेशानी हो रही है। जबकि विभाग ओवरटाइम विवाद को सुलझा पाने में अब तक विफल रहा है। अधिकतर डिपो में बसों की तुलना में चालकों और परिचालकों की की संख्या कम हो गई है। केवल रोहतक डिपो से 24 बसों का संचालन बंद कर दिया गया। बसें नहीं मिलने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जींद रोडवेज डिपो की 185 में से 172 बसें ऑन रूट रहीं। इसमें से 16 बसें खराब हो गईं। ओवरटाइम के बंद होने से रोडवेज को रोजाना करीब 4 लाख का घाटा हो रहा है। नारनौल में रोडवेज ने चंडीगढ़ के अलावा अन्य रूटों पर बदलाव कर दिया है। नारनौल से जयपुर मुद्रिका सेवा को बंद कर दिया है। अब बसें नारनौल से जयपुर वाया दिल्ली जाने के बजाय सीधे नारनौल-जयपुर चल रही हैं।
वहीं, बस स्टैंड से सुबह चलने वाली बसों के रूटों में बदलाव कर दिया गया है। नारनौल से दिल्ली, जयपुर, अलवर और रोहतक समेत अन्य जगहों पर पहले जैसी चल रही हैं। रेवाड़ी जिले में रोडवेज की सेवाएं अस्तव्यस्त हैं। सबसे अधिक असर महेंद्रगढ़, मीरपुर, कोटकासिम व सोहना रूट पर पड़ रहा है। इन रूटों पर यात्रियों को डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा रहा है।
ऐसे गिने जा रहे चालक-परिचालक की ड्यूटी के घंटे
चालकों-परिचालकों की ड्यूटी के 48 घंटे गिनने के लिए शासन ने दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके तहत ड्यूटी से लौटने के बाद कर्मचारी किमी बताता है, जिसका मार्ग के हिसाब से आकलन करके आने वाले घंटों को उसके ड्यूटी रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है। मुख्यालय ने माना है कि सिटी बस एक घंटे में 25 किमी चलेगी। 85 किमी से ज्यादा दूर बस के जाने पर यदि नेशनल हाइवे पड़ता है, तो 48 किमी प्रति घंटा के हिसाब से ड्यूटी मानी जाएगी। यदि 85 किमी से कम है, तो उसका आकलन 40 किमी प्रति घंटा के हिसाब से होगा। बिना हाइवे वाले रूट पर 35 किमी प्रति घंटा के हिसाब से ड्यूटी मानी जाएगी।