हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एमपी और एमएलए के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने का पत्र पीएम नरेंद्र मोदी को लिखकर माननीयों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में अगर एमपी के लिए एमए और एमएलए के लिए बीए की योग्यता की शर्त चुनाव लड़ने के लिए लगाई जाती है तो हरियाणा में 30 एमएलए का पत्ता कट जाएगा।
चूंकि, हरियाणा की वर्तमान विधानसभा में 60 एमएलए ही ग्रेजुएट, इसके समकक्ष डिग्री धारक या ज्यादा पढ़े लिखे हैं। सभी दलों के 30 विधायक ऐसे हैं, जिनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं या इससे कम है। कुल 90 विधायकों में से 25 बीए, 17 विधायक 12वीं पास, 20 ग्रेजुएट बिजनेसमैन, 12 एमए, चार विधायक आठवीं पास, एक पांचवीं पास, आठ विधायक दसवीं पास व दो पीएचडी हैं।
न्यूनतम शिक्षा का दिया सुझाव : मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पटना में प्रवासी हरियाणा सम्मेलन में भी कहा कि उन्होंने पीएम व केंद्र सरकार को पत्र लिखकर एमपी व एमएलए के लिए न्यूनतम योग्यता तय करने का सुझाव दिया है। हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं में न्यूनतम शिक्षा अनिवार्य करने का प्रयोग सफल हो चुका है। देश के सभी राज्यों को पंचायती राज संस्थाओं में न्यूनतम शिक्षा लागू करने की बात सर्वोच्च न्यायालय ने भी कही है।
जनता की अगुवाई करने को पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं: हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि सांसदों और विधायकों के लिए पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। जनता की अगुवाई कोई भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने जनता की अगुवाई करके देश को आजाद कराया, वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का यह कहना कि सांसद और विधायक पढ़े-लिखे ही होने चाहिए, सही नहीं है। हुड्डा सीएम खट्टर की उस मांग पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने केंद्र से सांसदों और विधायकों के लिए शैक्षणिक योग्यता का मानक बनाने की मांग की है।