चंडीगढ़। भारत में परिवार भावना सर्वोपरि है। हमारे साज भी हमारे परिवार के सदस्य हैं। इसलिए साज का सम्मान करते हुए उसकी साधना करना एक कला साधक के लिए अति जरूरी है। यह बात वीरवार को सेक्टर-42 के राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रख्यात बांसुरी वादक चेतन जोशी ने व्याख्यान देते हुए कही। इस दौरान उन्होंने बांसुरी वादन भी किया। उनके साथ तबले पर महमूद खान ने संगत की।
चेतन जोशी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अपने गुरुओं का नाम लेते हुए कान पकड़ते हैं। यह सम्मान और विनम्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कला साधना में अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने दोपहर के तृतीय पहर का राग वृंदावनी सारंग बजाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद रूपक ताल में एक बंदिश भी सुनाई और एक ही बांसुरी में साढ़े तीन सप्तक बजाकर सबका दिल जीता। चेतन जोशी ने छात्राओं के प्रश्नों के भी उत्तर दिए। वह भारत के राष्ट्रपति की ओर से 2019 में केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। इसके अलावा वे सुरमणि, बिस्मिल्ला खान सम्मान, संगीत कला गौरव इत्यादि पुरस्कारों से भी सम्मानित हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. अनीता कौशल, वाइस प्रिंसिपल डॉ. आभा लखनपाल, संगीत विभाग की डीन अंजू त्रिखा, संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रूमिना, संगीत विभाग के डॉ. अशोक चंब्याल, पन्ना लाल गंगानी, नृत्य विभाग के डॉ. अमित गंगानी, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सचिव राजेश आत्रेय, प्रसिद्ध सारंगी वादक पंडित विनोद पंवार सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय की संगीत विधा की छात्राएं उपस्थित रहीं।