सोनी टीवी के प्रतिष्ठित सिंगिंग शो ‘इंडियन आइडियल’ में पंजाब ने जलवा बिखेरा है। पंजाब के अलग अलग क्षेत्रों से आए तीन युवाओं ने टॉप-10 में पहुंचकर न सिर्फ सूबे का मान बढ़ाया गया बल्कि अपनी गायकी से देश के लोगाें को दीवाना बना दिया है।
शो के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एक ही राज्य के तीन सिंगर टॉप-10 में पहुंचे हैं। ये सिंगर हैं भटिंडा के सनी, अमृतसर के रिदम कल्याण और ऋषभ चतुर्वेदी। अपनी गायकी के हुनर से इस मुकाम पर पहुंचे ये युवा अपनी उपलब्धि से खासा उत्साहित हैं। हुनर के इन बेताज बादशाहों ने इस मुकाम तक पहुंचने की अपनी जर्नी अमर उजाला के साथ साझा की।
छह मौसियों के सपोर्ट से मिला मुकाम : रिदम
अमृतसर के रिदम कल्याण ने बताया कि उन्हें यह मुकाम अपनी छह मौसियों मंजू, अंजू, रीषू, रितू, निंदू और बिंदू के कारण मिल पाया है। उन्होंने बताया, मां से ज्यादा सिंगिंग के लिए मौसियों ने सपोर्ट किया है। रिदम से मौसियों को इस कदर प्यार है कि वह शो के दौरान तीन बार मुंबई जा चुकी हैं। मौसियों के अलावा रिदम के मामा शशिगिल जो पेशे से पंजाबी सिंगर हैं, वह भी पूरा सहयोग कर रहे हैं। गायकी की कुछ बारीकियां रिदम ने अपने मामा से भी सीखी हैं।
डरता हूं कहीं पुरानी जिंदगी में न चला जाऊं : सनी
भटिंडा के रहने वाले सनी की कहानी किसी को भी भावुक करने के लिए काफी है। पिता की मौत के बाद सनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां सीमा देवी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। कर्ज से घर बिक जाने के बाद मां ने चावल बेचकर सनी को पढ़ाया। पैसे के अभाव में नुसरत फतेहअली खान के गाने सुनकर गायकी का जज्बा पैदा हुआ। लोगों के सपोर्ट से इंडियन आइडियल पहुंचे। सनी ने बताया कि अब इतना आगे आने के बाद डर लगता है कि कहीं फिर से उसी जिंदगी में न चला जाऊं।
खुद की अलग पहचान बनाना है लक्ष्य : ऋषभ
पंजाब की सिंगर चतुर्वेदी फैमिली से ताल्लुक रखने वाले ऋषभ चतुर्वेदी खुद की अलग पहचान बनाने चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अनुज चतुर्वेदी और मां मीनू चतुर्वेदी पंजाबी सिंगर हैं। पंजाब में उनकी पहचान है और वह भी उन्हीं के बेटे के रूप में पहचाने जाते हैं। लेकिन इंडियन आइडियल में पहुंचने के बाद अब उनकी अलग पहचान बनी है। गायकी उनका पैशन है और इसी के जरिए वह ऐसी पहचान बनाना चाहते हैं जहां उनकी अलग ही पहचान हो सके।