कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जिनके बारे में लोग गंभीर नहीं होते। ये साइलेंट किलर की तरह काम करती हैं और इंसान को ऐसी स्थिति में पहुंचा देती हैं, जहां ठीक होना मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक बीमारी का नाम ऑस्टियोपोरोसिस है।
इंडियन सोसाइटी आफ बोन एंड मिनरल रिसर्च (आईएसबीएमआर) के सेक्रेटरी व पीजीआई एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा. संजय बडाडा कहते हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ऑस्टियोपोरोसिस होने के एक साल बाद 20 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर से ज्यादा आस्टियोपोरोसिस से मौतेँ होती हैं। महिलाओं में तो खासतौर पर।
खोखली होने लगती है हड्डी
हड्डियों को करता है कमजोर
प्रो. बडाडा के मुताबिक हड्डियां कमजोर होने पर आस्टियोपोरोसिस की बीमारी होती है। इसमें हड्डियों का बोन मास कम हो जाता है और वे भुरभुरी हो जाती हैं। इस बीमारी के दर्द के अलावा हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। यह धीरे-धीरे होता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में इसे रोका जाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जानना चाहिए। महिलाओं में यह ज्यादा होता है, क्योंकि बढ़ती उम्र में एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन कम होने लगता है। यह हॉर्मोन महिलाओं को हड्डियों के साथ-साथ दिल की समस्या से भी बचाता है।
कल मुफ्त में कराएं बीडीटी टेस्ट
हड्डियों की अनदेखी
20 अक्तूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य पर आईएसबीएमआर और पीजीआई के एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट की ओर से सेक्टर 23 स्थित सीनियर सेकेंडरी माडल स्कूल में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। सुबह 8.30 बजे से बोन डेंसिटी टेस्ट (बीडीटी) किया जाएगा, जो पूरी तरह से मुफ्त होगा।
इसका समय निर्धारित है। जो पहले आएगा उसे इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इस दौरान पीजीआई और आईएसबीएमआर की टीम बीडीटी टेस्ट के आधार पर मुफ्त परामर्श देगी। बीमारी के कारण, उसका इलाज, डाइट प्लान सहित बीमारी से संबंधित कई अन्य विषय पर विशेषज्ञ लोगों को जागरूक करेंगे। इस दौरान कैल्शियम की डाइट पूरी करने के लिए कुछ नुस्खे भी बताए जाएंगे।