मुजफ्फरनगर ने जीत लिया दिल
तीसरे सत्र में आलोचक ओमैर अहमद ने ‘मुजफ्फरनगर में दिवाली’ किताब के लेखक तनुज सोलंकी के साथ बातचीत की। तनुज सोलंकी ने कहा कि इस किताब में उन्होंने मुजफ्फरनगर के बारे में और उसके आसपास की छोटी कहानियों के बारे में लिखा है। यह शहर के लोगों के दृष्टिकोण से लिखी गयी हैं, आखिरकार इसे थोड़ी दूरी से देखने और इन कहानियों के माध्यम से अपनी यादों को साझा करने की कोशिश की गई है। वे इस छोटे से शहर को उन लोगों के अनुभवों के माध्यम से सामने लाते हैं, जिनके अतीत इस शहर से वास्ता रखता है।
जल थल मनपर हुआ मंथन
‘जल थल मल’ किताब के लेखक सोपान जोशी को सौरभ द्विवेदी के साथ बातचीत करते हुए देखा गया। इसके बाद, ई-बुक ‘एक थी मैना, एक था कुम्हार’ के लेखक हरि भटनागर की आलोचक विभूति नारायण राय के साथ बातचीत हुई। पुस्तक ‘द वाइल्डिंग्स’ की लेखक निलंजना रॉय और आलोचक रिहान नजीब के बीच भी वार्तालाप का एक दिलचस्प सत्र हुआ।
अंतिम दिन का आकर्षण होंगे अशोक वाजपेयी
‘सीएलएफ के अंतिम, ‘द डॉटर्स ऑफ द सन’, ‘द एपिक सिटी- द वर्ल्ड ऑन द स्ट्रीट्स ऑफ कोलकाता’, ‘ग्यारवी-ए के लड़के’ और ‘बल्लाड ऑफ काजीरंगा’ जैसी किताबों पर चर्चाएं होंगी। इतना ही नहीं, कविताओं पर आधारित एक कार्यक्रम ‘अनुवाद संवाद - अनुवाद में विश्व कविता’ भी आयोजित किया जायेगा।