आर्गेनिक उत्पाद महंगे जरूर हैं, लेकिन इनकी कहानी बड़ी रोचक है। किसी के घर से इसका जायका बाहर आया तो किसी के खेत की मिट्टी की खुशबू फिजा में घुली। यही कारण है कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक हजारों एकड़ में आर्गेनिक खेती शुरू होने लगी है। इसके उत्पाद महंगे जरूर हैं, लेकिन स्वाद मिल गया तो फिर इनके बगैर रहना मुश्किल है। नोएडा के एक घर में बने बिस्किट उस परिवार की नाती को इस कदर भाया कि वह देशभर में मशहूर हो गया। कुछ इसी तरह की कहानियां शहर में चल रहे आर्गेनिक फेस्टिवल में सामने आ रही हैं।
सेक्टर-10 स्थित लेजर वैली में आयोजित तीन दिवसीय आर्गेनिक फेस्टिवल का सोमवार को आखिरी दिन है। शनिवार से सोमवार तक चलने वाले इस फेस्ट में देशभर से करीब 200 महिला किसान अपने 1000 से ज्यादा आर्गेनिक उत्पादों के साथ आईं हैं। फेस्ट के आखिरी दिन केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी भी चंडीगढ़ पहुंचेंगी। दोपहर 1 बजे वे फेस्ट में मौजूद महिला किसानों से मिलेंगी।
खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए बनाते हैं बिस्किट
नोएडा से आई किरण ने बताया कि उनकी बेटी मलयेशिया में रहती है। पिछले साल एक दिन कॉल आया कि वहां ढाई साल की पोती निया कुछ खाती नहीं है। मैंने घर पर रेसिपी तैयार की और घर पर मौजूद सामानों को मिलाकर कुछ बिस्किट बनाए। बिस्किट निया को तो पसंद आए ही साथ ही मेरी बेटी को भी बहुत अच्छे लगे। इनमें किसी तरह का आर्टिफिशियल फ्लेवर नहीं था, न ही मैदे और अंडे का इस्तेमाल किया।
स्वाद के लिए मसालों का इस्तेमाल किया था। बेटी ने इन बिस्किट को बेचने का आइडिया दिया। एक साल हो गया है अब देश के अलग-अलग हिस्सों में हमारे बिस्किट के चाहने वाले हैं। दुबई और साउथ अफ्रीका भी सैंपल भेजे हैं। इस साल मार्च-अप्रैल में प्लांट लगाने की योजना है। खासतौर पर हम छोटे बच्चों के लिए बिस्किट बनाते हैं।
उत्तराखंड का ऐसा गांव, हर कोई करता है आर्गेनिक खेती
उत्तराखंड के नैनीताल का गांव जलना। पहाड़ों पर बसा यह गांव खास है। जलना से अपने पति फणेंद्र से साथ आईं दीपा देवी ने बताया कि उनके गांव में करीब 300 परिवार रहते हैं और सभी आर्गेनिक खेती करते हैं। यहां पानी की बहुत कमी है। सारी फसल बारिश पर निर्भर करती है। वे मार्च से मई तक बिल्कुल खाली रहते हैं। इसके अलावा पशुओं से फसल को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। गांव में मुख्य तौर पर मटर, अदरक, हल्दी, मिर्च, राजमा, नींबू, तीन रंगों वाली अरबी की खेती की जाती है। दीपा देवी ने बताया कि कोटाबाघ की मटर काफी मशहूर है। कांट्रैक्टर 150 रुपये किलो मटर उनसे खरीदता है जो बाद में दुकानों में अलग-अलग दामों पर बेचा जाता है।
दो युवाओं ने गधी के दूध से खड़ा किया बिजनेस, विदेशों में कस्टमर
आप गाय, भैंस, बकरी और ऊंटनी के दूध के गुणों से तो वाकिफ होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि सबसे महंगा गधी का दूध है। आंध्रप्रदेश में एक चम्मच गधी के दूध की कीमत 50 रुपये है और 2000 रुपये लीटर। आर्गेनिक मेले में दिल्ली से आए रिऋभ और पूजा गधी के दूध से बने साबुन लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि यह साबुन यूरोपियन देशों में बहुत प्रसिद्ध है और वहां लोग गधी के दूध से बने साबुन से नहाते हैं।
भारत में गधों का ज्यादा इस्तेमाल सिर्फ बोझा ढोने के लिए किया जाता है। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में गधे पालने वालों से संपर्क किया और उन्हें जागरूक किया। भारत में पहली बार इस तरह का कांसेप्ट आया है। अब तक वे 1500 साबुन बेच चुके हैं। विदेशों में साबुन भेजा गया है। गधे पालने वालों की कमाई कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। लोगों को यह साबुन काफी पसंद आ रहा है। आने वाले दिनों में वे फेसवॉश, फेसक्रीम व मोस्चराइजर भी मार्केट में लाने वाले हैं।
व्हाट्सएप से लोगों की समस्या हल करते हैं हरिंदर सिंह
चंडीगढ़ के पास आर्गेनिक खेती करने वाले हरिंदर सिंह संधू न सिर्फ खेती करते हैं बल्कि लोगों में आर्गेनिक उत्पादों के प्रति जागरूकता भी फैला रहे हैं। उनका एक व्हाट्सएप ग्रुप है जिसमें आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों के अलावा हॉर्टिकल्चर विशेषज्ञ व डॉक्टर हैं। ये सभी लोगों को आर्गेनिक उत्पादों के प्रति जागरूक करने के साथ व्हाट्सएप ग्रुप पर सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि इस ग्रुप में पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के लोग जुड़े हुए हैं जो अपनी खराब हो रही फसल की फोटो भेजते हैं और ग्रुप में मौजूद डॉक्टर उसे ठीक करने के उपाय उसी समय बताते हैं।