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मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए ये नया फरमान

Sun, 06 Jul 2014 02:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला सिटी
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ड्रग विभाग हरियाणा ने एडिक्शन करने वाली दवाइयों पर नजर रखने रखने के लिए केमिस्टों को एच-वन में 46 दवाइयों को तीन साल तक रिकार्ड रखने के आदेश दिए हैं। यह जानकारी ड्रग निरीक्षक सुनील दहिया ने दी।
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उन्होंने बताया कि नए कानून के मुताबिक केमिस्ट 46 दवाइयों को बिना डाक्टर की पर्ची के मरीज को नहीं दे सकता। उन्हें तीन वर्ष तक ऐसी दवाओं का रिकार्ड भी अपने पास रजिस्टर में रखना होगा।

उन्होंने बताया कि केमिस्ट को रजिस्टर में मरीज का नाम, डाक्टर का नाम सहित अन्य विवरण न केवल लिखने होगे बल्कि रजिस्टर को तीन साल तक संभाल कर भी रखना होगा।
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दहिया ने बताया कि सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑरगनाइजेशन डीसीआर की ओर से जारी आदेशों में केमिस्ट की दुकानों पर एंटीबायटिक दवाइयों में मरीजों के साथ डाक्टर का रिकार्ड भी रखना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि रोजाना कमिस्टों द्वारा बेची जाने वाली एटिंबैटिक दवाईयां लिखने वाले डाक्टरों और मरीज का नाम, बिल व सीरियल नंबर की पूरी जानकारी रजिस्टर में लिखनी होगी।

एंटीबैटिक तथा नारकोटिक्स दवाईयों के लंबे समय तक व जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने से शरीर के अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है इसलिए इन दवाइयों पर नजर रखने के आदेश जारी किये गये है।

उन्होंने बताया कि एच 1 में शामिल दवाईयों में अलग रंग से आर एक्स लिखना होगा। इसके अलावा शराब से सिगरेट के पैकेटों की भांति चेतावनी भी लिखनी पडे़गी।

उन्होने बताया कि एच-1 कैटागरी दवाईयों में ह्दय रोग, टीबी, किडनी के अलावा प्रयोग में लाई जाने वाली हैवी एटिंगोटिक्स, अधिक बनाने वाली नींद की गोलियां शामिल हैं।

इसके अलावा डैरीपैनम, पैट्रांजोसिल, हाईड्रोक्लाईड, मैक्सीफलो, क्रासरीन, ट्रोमाटोल, जोलपिडेम व अल्ट्राजोलम इत्यादि दवाइयां सूची में शामिल है जिनकी बिक्री पर विभाग पैनी नजर रखेगा।
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