सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता और पार्षद प्रेमलता ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने कांग्रेस और आप पार्षदों को मार्शलों से जबरन बाहर करवाकर एजेंडा आनन-फानन में पास कराया। इसमें भ्रष्टाचार और मिलीभगत की बू साफ झलक रही है।
200 से 300 करोड़ रुपये का नुकसान
विपक्षी पार्षदों का दावा है कि इस सौदे से नगर निगम को 200 से 300 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व नुकसान होगा। उन्होंने इसे शहर के विकास कार्यों और वित्तीय स्थिरता के साथ धोखाधड़ी बताया। तीनों पार्षदों ने चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही एजेंडे को निरस्त करने और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में नगर निगम की संपत्तियों के सौदों में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए। नगर निगम ने पॉकेट नंबर 6 में पांच प्लांट बेचने का फैसला किया है। इससे निगम को कम से कम 796 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।