चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट का कार्यकाल पूरा होने में महज तीन दिन बाकी हैं। इसी के साथ पूरे कैंपस में यही चर्चा है कि सिंडिकेट का कार्यकाल बढ़ेगा या नहीं। इंतजार हाईकोर्ट के निर्णय का है। माना जा रहा है कि 31 दिसंबर से पहले कुछ न कुछ निर्णय आ सकता है। इसके लिए पूर्व सीनेटरों व कुछ सिंडिकेट के सदस्यों ने पूरी ताकत लगा दी है। कुछ की धड़कनें भी बढ़ी हुई हैं।
सिंडिकेट का कार्यकाल एक साल के लिए होता है। पिछले साल दिसंबर में सीनेट के जरिए इसका चुनाव हुआ और सदस्य चुने गए। सिंडिकेट पीयू के हर प्रकरण को लेकर निर्णय लेती है। चाहे वह शिक्षकों के प्रमोशन को हो या फिर बजट निर्धारण का। हर काम सिंडिकेट के होकर गुजरता है। इस साल सिंडिकेट की महज तीन बैठक ही हुईं। उसके बाद कोरोना आ गया और बैठकें नहीं हो पाईं। अब तीन दिन में कार्यकाल पूरा हो जाएगा। शिक्षकों व छात्रों के बीच चर्चा है कि सिंडिकेट के कार्यकाल का अब क्या होगा? बढ़ेगा या सिंडिकेट भी खत्म हो जाएगी। इस पर हाईकोर्ट के निर्णय की ओर सब लोग देख रहे हैं। सिंडिकेट का चुनंाव हो नहीं सकता। क्योंकि सीनेट ही इसका चुनाव करती है।