पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पार्टी संगठन की पहली सूची पर सवाल खड़े हो गए हैं। आलाकमान के द्वारा मंजूर की गई सिद्धू की सूची में महिलाओं की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। लिस्ट में मात्र 8.5 प्रतिशत महिलाओं को नेतृत्व दिया गया है। 82 जिला और कार्यकारी प्रधानों की सूची में सिर्फ 3 महिलाओं को शामिल किया गया है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया था। इसके बाद भी पार्टी संगठन में महिलाओं की अनदेखी से कई सवाल उठने लगे हैं।
जिला और कार्यकारी प्रधानों की लिस्ट में एक बार फिर कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना दबदबा कायम रखा। 28 जिलों की लिस्ट में 18 में सिद्धू ने अपने खेमे की नए चेहरों को शामिल किया है। जबकि 10 जिलों में पुराने चेहरों को आलाकमान ने तरजीह दी है। जनवरी 2020 में सोनिया गांधी ने पंजाब में संगठन की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था, जिसके बाद से इन पदों पर कोई नियुक्तियां नहीं हुई थीं।
पंजाब कांग्रेस में यह पहली बार होगा कि जिला प्रधान के साथ कार्यकारी प्रधानों की भी नियुक्तियां की जाएंगी। सिद्धू ने यह फार्मूला बनाकर मंजूरी के लिए आलाकमान को दिया था लेकिन विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विरोध के कारण इसकी मंजूरी में आलाकमान ने देरी की। हालांकि सिद्धू की जिद के आगे आलाकमान ने विरोध को नजरअंदाज कर लिस्ट को मंजूरी दे दी है।
लिस्ट में कांग्रेस प्रधान सिद्धू का प्रभाव पूरी तरह से दिखाई देता है। 28 जिलों की सूची में सिर्फ 10 जिलों में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की चल पाई। जिस कारण फतेहगढ़ साहिब, पटियाला देहात, अमृतसर देहात, पठानकोट, लुधियाना शहर और देहात, फाजिल्का और होशियारपुर में पुराने चेहरों को ही शामिल किया गया है। जबकि 18 अन्य जिलों में नए चेहरों को पार्टी की कमान सौंपी गई है। संगरूर जिले को लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।