पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई तबादला नीति के तहत मंगलवार को स्कूल अध्यापकों के लिए बटन दबाकर पहले ऑनलाइन तबादले के आदेश जारी किए। इसका उद्देश्य तबादला प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
स्कूल शिक्षा विभाग की इस नई नीति को इसी साल जनवरी में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी और जून में नोटिफाई किया गया था। अब टीचिंग स्टाफ के सभी तबादले सिर्फ ऑनलाइन ही किए जाएंगे। इससे तबादलों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति को अन्य विभागों में लागू करने की भी उनकी सरकार की योजना है।
तबादले के 11063 आवेदनों में से 4551 के ऑर्डर जारी
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि तबादलों के लिए कुल 11063 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 4551 के लिए ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। पहले दौर के दौरान 6506 आवेदनों पर कार्रवाई नहीं की गई है। इस उद्देश्य के लिए स्कूलों को 5 जोन में बांटा गया था। तबादलों के दावों पर फैसला करने के लिए विस्तृत मापदंड तैयार किए गए हैं।
इन मापदंडों में सेवा काल, आयु, महिलाएं, विधवाएं, तलाकशुदा, अविवाहित महिलाएं, अपंग व्यक्तियों, पति-पत्नी मामलों जैसी विशेष श्रेणियों के लिए अंक रखे गए हैं। इसके अलावा अध्यापकों की परफार्मेंस के लिए कुल 250 में से 90 अंक मुहैया करवाए गए। इसमें अध्यापकों के नतीजे, सालाना गुप्त रिपोर्ट आदि शामिल हैं।
इसके अलावा 15 अंक उन अध्यापकों को मुहैया करवाए गए, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। इसका उद्देश्य अध्यापकों को अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। अध्यापकों की कुछ श्रेणियों को मेडिकल आधार पर भी तबादला नीति से पूरी तरह छूट दी गई है।
इनमें कैंसर के मरीज/डायलसिस पर, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, सिकल सेल अनीमिया, थैलेसीमिया आदि के साथ पीड़ित शामिल है। इस नीति के अनुसार एक बार तबादला होने के बाद तीन साल तक उनका तबादला नहीं होगा।