जिला अदालत की आईडी से फर्जी तरीके से चालान निपटाने का पर्दाफाश
ऑनलाइन रिकॉर्ड में दिखे चालान लेकिन कोर्ट की एंट्री बुक खाली
आईटी एक्ट में सीक्रेट एफआईआर दर्ज, साइबर टीम जांच में जुटी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। जिला अदालत की आईडी से फर्जी तरीके से ट्रैफिक चालान निपटाने का मामला सामने आया है। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि अदालत की आईडी का दुरुपयोग कर कई चालानों को ऑनलाइन निपटाया गया जबकि वे कभी अदालत में पहुंचे ही नहीं। अदालत के डिस्पोजल रजिस्टर में भी इन चालानों की कोई एंट्री नहीं मिली।
गड़बड़ी का पता चलने पर मामला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के संज्ञान में लाया गया। उन्होंने तुरंत चंडीगढ़ पुलिस को जांच के आदेश दिए। इसके बाद सेक्टर-36 थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत सीक्रेट एफआईआर दर्ज कर ली है। अब साइबर टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अदालत की आईडी का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ।
थाना प्रभारी खुद इस केस की जांच अधिकारी हैं। पुलिस का कहना है कि अगर जांच में किसी अदालत कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उससे पूछताछ की जाएगी। फिलहाल आईडी का आईपी एड्रेस खंगाला जा रहा है ताकि असली आरोपी तक पहुंचा जा सके। हालांकि, मामला कुछ महीने पुराना है लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
यह है पूरा मामला
पुलिस को अदालत की ओर से मिले पत्र में बताया गया कि कोर्ट नंबर-14 की आईडी से कुछ ट्रैफिक चालान ऑनलाइन निपटाए गए दिखे जबकि वे अदालत में पेश ही नहीं हुए थे। चालानों के रसीद नंबर भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद संदेह हुआ कि किसी ने अदालत की आईडी का गलत इस्तेमाल किया है। एनआईसी की ओर से अदालतों को ट्रैफिक चालान निपटाने के लिए 20 आईडी दी गई हैं जिनका उपयोग अदालत के कर्मचारी (अहलमद) करते हैं। चालान अदालत में पेश होने के बाद प्रोसीडिंग ऑफिसर जुर्माना तय करते हैं और भुगतान के बाद अहलमद उसे ऑनलाइन क्लियर करता है।
अहलमद की आईडी के दुरुपयोग की आशंका
पुलिस को आशंका है कि किसी ने अहलमद की आईडी का दुरुपयोग किया। सीजेएम के आदेश पर पुलिस ने आईटी एक्ट की धाराएं समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सूत्रों के मुताबिक अहलमद का कहना है कि उन्होंने अपनी आईडी किसी को नहीं दी। अब पुलिस तकनीकी जांच के जरिये यह पता लगाने में जुटी है कि आईडी ठगों तक कैसे पहुंची।
पहले भी हो चुकी है ठगी की वारदात
इसी साल सितंबर में भी जिला अदालत के नाम पर चालान निपटाने का झांसा देकर 11 लोगों से 46,900 रुपये की ठगी की गई थी। उस मामले में दो वकीलों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।