मोदी सरकार ने 05 सितंबर को ओआरओपी के संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर पूर्व सैनिकों को इसका लाभ दिए जाने की घोषणा की थी, लेकिन ये नोटिफिकेशन पूर्व सैनिकों को मंजूर नहीं है। पूर्व सैनिक इसमें सात त्रुटियों को दूर कराना चाहते हैं, इसलिए पूर्व सैनिकों ने इस नोटिफिकेशन को नकली ओआरओपी बताया है।
पहली मांग- पुराने और नए रिटायर्ड फौजियों को बराबर पेंशन देने के लिए जरूरी है कि पेंशन का रिव्यू हर एक साल बाद हो। यह ओआरओपी के सिद्धांत की जान है। सरकार इसे 5 साल में एक बार रिव्यू करना चाहती है। यह तो वन रैंक-पांच पेंशन बन जाएगा, इसलिए यह मंजूर नहीं। कंप्यूटर युग में सरकार का यह कहना कि सालाना रिव्यू संभव नहीं मात्र बहानेबाजी है।
दूसरी मांग- ओआरओपी सरकार के संसद में दिए बयान के मुताबिक 1 अप्रैल 2014 से जारी होनी थी। अब सरकार इंकार कर 1 जुलाई 2014 से जारी करना चाहती है। तीन महीने देरी क्यों? इससे सरकार गरीब फौजियों और वीर नारियों का 2100 करोड़ रुपये हड़पना चाहती है, जो पूर्व सैनिकों को मंजूर नहीं।
तीसरी मांग- ओआरओपी लागू करते समय उसी समय (यानि वित्त वर्ष 2013-14) के पेंशन आंकड़े लेने चाहिए। सरकार कैलेंडर वर्ष 2013 के औसत आंकड़े पर ओआरओपी को निर्धारित करना चाहती है। यह असमंजस में डालने वाला कदम है। इसके अमल से पेंशनर को 1000 से 3000 रुपये का नुकसान होगा और ओआरओपी की परिभाषा ही टूट जाएगी। ये पूर्व सैनिक नहीं होने देंगे।
197 दिन से दिल्ली में जारी है भूख हड़ताल
चौथी मांग- इस घोषणा में वीआरएस के रूप में एक नया जाल बिछाया गया है। वीआरएस फौजी शब्दावली में कोई मायने नहीं रखता। यह सिविल कंपनियों का शब्द है, अपने कर्मचारियों की छंटनी करने के लिए एक मोटी रकम देकर कंपनियों कर्मचारी को हटा देती हैं।
हमें शक है कि सरकार दुर्भावनापूर्ण इसको प्रीमेच्योर रिटायर्ड (पीएमआर) से जोड़ने की कोशिश करेगी, जिससे 60 फीसदी पेंशनर (अफसर, जेसीओ, ओआर) को ओआरओपी प्रतिक्रिया से वंचित किया जा सकता है। इस वीआरएस का अचानक ओआरओपी से जोड़ा जाना सरकार का षड्यंत्र है। जो बरदाश्त नहीं होगा।
पांचवीं मांग- ओआरओपी संबंधित मतभेद सुलझाने के लिए 5 सदस्यों का आयोग होना चाहिए, जिसमें सेवारत और रिटायर्ड फौजी हों। सरकार ने केवल एक जज के आयोग का ऐलान किया है। अभी तक सरकार ने जितने आयोग बैठाए हैं, उनमें केवल बाबू होते हैं और उनके फैसले फौजियों के खिलाफ ही रहे हैं। इसलिए सरकार के इस आयोग में फौजी प्रतिनिधि चाहिए।
छठी मांग- ओआरओपी अनंत काल का सिद्धांत है- केवल अभी एक-दो वर्षों के लिए नहीं। इसलिए सरकार इसे जारी करते हुए चालाकी न करे।
सातवी मांग- ओआरओपी वेतन आयोग से किसी भी तरह जुड़ा हुआ नहीं है। इसे वेतन आयोग से भी जोड़ा जाए, ताकि इसका लाभ पूर्व फौजियों को मिलता रहे।
दिल्ली से आए पूर्व सैनिकों के नेताओं ने बताया कि दिल्ली में 197 दिन से लगातार भूख हड़ताल जारी है और आगे भी संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा। रोजाना वहां विभिन्न राज्यों से आए पूर्व फौजियों का जत्था भूख हड़ताल पर बैठ रहा है। रैली में आह्वान किया गया कि सभी राज्यों से विभिन्न शहरों के लोग दिल्ली में भूख हड़ताल के लिए निरंतर पहुंचते रहें।