संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक अधिवक्ता और उनके मुवक्किलों के बीच रिश्वतखोरी और धमकी के आरोपों को लेकर दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। दोनों मामले एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज की गई क्रॉस-शिकायतों से जुड़े हैं।
पहले मामले में हाईकोर्ट ने 22 अगस्त 2025 को आदेश के तहत सीबीआई को अधिवक्ता अंकुश धनरवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के निर्देश दिए थे। आरोप है कि अधिवक्ता धनरवाल ने अपने मुवक्किल बलविंदर सिंह (गांव मइदवास, पंजाब) और उनके बेटे रंजीत सिंह से हाईकोर्ट में लंबित पंचायत चुनाव संबंधी याचिका के फैसले को प्रभावित करने के लिए रिश्वत मांगी थी। बताया गया है कि यह रकम एक सरकारी वकील और न्यायिक अधिकारी के नाम पर मांगी गई थी, ताकि मामला अनुकूल रूप से निपटाया जा सके। हाईकोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 7ए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 61(2) के तहत नियमित मामला दर्ज किया है। इस जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर पवन कुमार को सौंपी गई है। वहीं, समानांतर रूप से हाईकोर्ट ने अधिवक्ता अंकुश धनरवाल की शिकायतों पर भी संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच के निर्देश दिए हैं। धनरवाल ने बलविंदर सिंह और रंजीत सिंह पर उन्हें धमकाने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। इस पर सीबीआई ने दूसरा मामला बीएनएस 2023 की धारा 329(3)(4), 351(2)(3) और 3(5) के तहत दर्ज किया है। इस जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर मनीष कौशिक को दी गई है।