चंडीगढ़। सर्व पितृ अमावस्या शनिवार 10 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस बार शनिवार होने से शनैश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा के हस्त नक्षत्र में होने से गज छाया योग बनेगा। इस योग में पूरे दिन श्राद्ध, पितृ तर्पण और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। यह जानकारी सेक्टर-8 स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी पंडित अयोध्या प्रसाद शास्त्री ने दी।
उन्होंने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर पितृपक्ष के श्राद्ध संपन्न होते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से श्राद्ध करने पर परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, दीर्घायु और वंश वृद्धि होती है। पितरों के निमित्त दान-पुण्य करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है।
सेक्टर-30 के पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि शनिवार को शनैश्चरी अमावस्या होने से इस दिन शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त कर्मकांड के साथ शनिदेव की आराधना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पीपल की 108 परिक्रमा का विधान
पंडित अयोध्या प्रसाद शास्त्री के अनुसार, गज छाया योग में भगवान विष्णु की पूजा कर दीप जलाने और पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करने का विधान बताया गया है। श्रद्धालु इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं।