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कंपकंपाती ठंड में बर्फ पर सोते हैं 'संत लाल'

Thu, 08 Jan 2015 08:47 AM IST
राजेश यादव/अमर उजाला, सीहमा
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इस सर्दी के मौसम में जहां ठंडे पानी नहाने में सबको डर लगता है वहीं एक बुजुर्ग ऐसे है जो बर्फ की सिल्ली पर सोते हैं। अगर वह दिन में बर्फ न खा लें तो उनको चैन नहीं आता। गर्मी में अगर रजाई और अलाव न मिले तो बुजुर्ग को नींद नहीं आती और कंपकंपी चढ़ी रहती है।
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शायद यह बात सुनकर सब आश्चर्यचकित हो जाए। लेकिन क्षेत्र के गांव डेरोही अहीर के रहने वाले संतलाल का शरीर ऐसा है जिनका शरीर मौसम के विपरीत काम करता है। गर्मी में रजाई मिले तो ही रात को नींद आती है। दिन में दो-तीन बार अलाव के आगे बैठने पर ही गर्मी के मौसम में लगी सर्दी उतरती है।

सर्दी के मौसम में जोहड़ या नहर में दिन में कम से कम तीन बार नहाना। घर पर बर्फ की सिल्ली पर सोना और बर्फ खाना। यह सब आम दिनचर्या है। जिस तरह नशा करने वाले को नशीली वस्तु जब तक ना मिले, तब तक वह तड़फता है।
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ठीक उसी तरह अगर इस बुजुर्ग को गर्मी में आग और सर्दी में बर्फ समय पर ना मिले तो समझो शरीर व दिमाग में हड़बड़ाहट शुरू हो जाती है। आम जनों से अलग अंदाज के कारण क्षेत्र के लोग इस बुजुर्ग को ‘मौसम विभाग’ के नाम से पुकारते हैं।

वैसे इस शख्स का असली नाम संतलाल है। 60 बरस के इस बुजुर्ग का शरीर बचपन से ही इसी विपरीत मौसम से चल रहा है। अब तो परिजनों को भी यह आम बात लगने लगी है। मौसम विभाग के नाम से पहचान बना चुके इस राजमिस्त्री ने ‘अमर उजाला’ के साथ अपनी बात सांझा की।
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गर्मी में रजाई और अलाव

संतलाल का कहना है कि गर्मी में बहुत सर्दी लगती है। कंबल और रजाई ओढ़ कर बिस्तर में सोना पड़ता है। दिन में 10 बजने के बाद अलाव का सहारा लेना पड़ता है। ज्येष्ठ माह में जब लोग लू से बचने के लिए एसी, कूलर व पंखों का इस्तेमाल करते है। उस वक्त संतलाल को दिन में चलने वाली लू सोने पर सुहागे का काम करती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए परिजन ओढ़ने वाले गर्म वस्त्र 3 माह की बजाय पूरे साल भर बाहर ही रखते है। गर्मी में इन वस्त्रों को बुजुर्ग इस्तेमाल करता है और सर्दी में परिजन।

सर्दी में गर्मी का अहसास
अब दिसंबर माह की सर्दी आरंभ है। लोग ठंड के मारे जहां गर्म बिस्तरों में दुबके रहते है। ठीक उसी समय यह जनाब बाहर खुले में नजदीक नहर या जोहड़ में डुबकी लगाते रहते हैं। इस कड़ाके की सर्दी में दिन में कम से कम तीन बार ठंड पानी नहर या जोहड़ में नहाना, उसके बाद बर्फ के ऊपर लेटकर शरीर को आराम देना ही संतलाल की दिनचर्या है।

कुछ वर्षों तक तो आस-पड़ोस के मकानों में रखे फ्रीज से बर्फ लेकर काम चलता रहा। आखिरकार पड़ोसियों ने भी सर्दी के मौसम में बर्फ तैयार करनी छोड़ दी। ऐसे में अब इस मौसम में बुजुर्ग बाजार से रोजाना बर्फ खरीदकर लाता है। जब तक बर्फ ना पिघले, उस पर लेटकर आराम करता है। इसी बर्फ को खाकर अपनी बैचेनी मिटाने का प्रयास करता है।
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कभी नहीं हुआ बीमार

संतलाल का कहना है कि वह 60 बसंत देख चुका है। एक बार भी बीमार नहीं हुआ। सिर्फ सादा खाना दाल-रोटी ही रोजाना का भोजन है। वर्ष 1976-77 में मैट्रिक पास की। 21 साल की उम्र में शादी हुई। परिवार में चार लड़के है। मौसम के विपरीत शरीर की यह हलचल अब संतलाल के अलावा उसके परिजन को भी आम लगने लगी है।

क्या कहते है डिप्टी सीएमओ
‘‘मौसम विभाग के नाम से जाने वाले इस शख्स के शरीर की हलचल के बारे में डिप्टी सीएमओ डा. अशोक कुमार का कहना है कि सर्दी और गर्मी का अहसास हमारे दिमाग में स्थित थर्मोरेगुलेटरी प्वाइंट से होता है। इस थर्मोरेगुलेटरी प्वाइंट को थैलेमस व हाईपो थैलेमस कंट्रोल करते है। इससे संबंधित कोई बीमारी होने पर ही मनुष्य को इस तरह का अहसास होता है। वैसे मैंने अपने जीवन में इस तरह का केस नहीं देखा है। मेडिकल कॉलेज स्तर पर यह एक शोध का विषय है।
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