भाजपा हरियाणा में अपना मुकाबला सीधे इनेलो से मान कर चल रही है। चुनाव में भाजपा को इनेलो और ओमप्रकाश चौटाला के प्रति जाट बिरादरी में उपजी सहानुभूति का डर सता रहा है। पार्टी को आशंका है कि चौटाला के जेल जाने के बाद इस बिरादरी की सहानुभूति चौटाला के प्रति कहीं और ज्यादा न हो जाए।
पार्टी की सारी उम्मीदें अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे, जाट मतों में बिखराव और गैर जाट वोटों के पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण पर टिकी हुई हैं। पार्टी को उम्मीद है कि मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां अंत समय में पार्टी के पक्ष में बड़ा लहर पैदा कर देंगी।
पार्टी में चौटाला के खिलाफ सीबीआई की ओर से चुनाव प्रचार के अंतिम समय में अदालत का दरवाजा खटखटाए जाने से नाराजगी भी है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि सीबीआई ने न केवल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में देरी की, बल्कि ऐसे समय में कोर्ट गई, जब प्रचार के लिए महज चंद दिन ही बाकी बचे थे।
हालांकि पार्टी को उम्मीद है कि चौधरी बीरेंद्र सिंह, कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ जैसे जाट नेता कुछ क्षेत्रों में अपनी बिरादरी को पार्टी के पक्ष में लाने में सफल होंगे। इसी रणनीति के तहत इन नेताओं को जाट बहुल क्षेत्रों में चुनाव प्रचार की बागडोर सौंपी गई है।
सीबीआई के अंतिम समय में कोर्ट जाने से पार्टी नेता खफा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कई नेता चुनाव प्रचार के अंतिम समय में सीबीआई की ओर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से नाराज हैं।
इन नेताओं का मानना है कि सीबीआई ने बहुत देर बाद इस आशय का फैसला लिया। अब चौटाला के जेल जाने के बाद जाट बिरादरी का इनेलो के पक्ष में ध्रुवीकरण का खतरा पैदा हो गया है।
राज्य के मतदाताओं में 26 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली जाट बिरादरी करीब तीन दर्जन सीटों के नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि नए हालात को देखते हुए भाजपा ने जाट बिरादरी को पार्टी से जोड़ने के लिए जाट नेताओं को आगे लाना शुरू किया है।
इसके तहत कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए चौधरी बीरेंद्र सिंह और कैप्टन अभिमन्यु को जाट बाहुल्य सीटों पर स्थिति संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा पार्टी ने दलितों में पैठ बढ़ाने के लिए डेरा सच्चा सौदा से भी संपर्क साधा है।
पार्टी का आकलन है कि मोदी की रैलियों का मतदाताओं में व्यापक असर हो रहा है। इसलिए चुनाव आते आते शहरी क्षेत्रों के मतदाताओं के साथ युवा मतदाता लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के पक्ष में खड़े होंगे।
सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
हाईकोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को शनिवार को तिहाड़ जेल अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश चौटाला द्वारा अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर दिया है।
चौटाला के चुनावी रैलियों को संबोधित करने पर सीबीआई ने हाईकोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करते हुए अंतरिम जमानत रद्द करने की याचिका दायर की थी।
जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने शुक्रवार को अपने निर्देश में कहा कि चौटाला अब स्वस्थ हैं, वह यात्रा कर सकते हैं, रैली कर सकते हैं तो उन्हें सरेंडर करना चाहिए।
इसलिए वह शनिवार को जेल अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करें। यदि उन्हें सेहत संबंधी कोई परेशानी होती है तो जेल प्रशासन उन्हें फौरन एम्स में जांच के लिए लेकर जाएं।
‘अधिकारों में दखल दे रही सीबीआई’
याचिका पर बचाव पक्ष की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने कहा कि चौटाला को मेदांता ने 3 अक्टूबर को छुट्टी दे दी थी। वह इसलिए रैली में गए थे ताकि यह जान सके कि खुले में जाने का उन पर क्या प्रभाव होगा। दूसरी ओर उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया।
सीबीआई उनकी जमानत फौरन रद्द करने की मांग करते हुए उनके अधिकार में दखल दे रही है। इस पर जस्टिस मृदुल ने दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट ने सीबीआई को कभी दखल देने की अनुमति कभी नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि हर चीज की एक सीमारेखा होती है वह सीमारेखा पार नहीं होनी चाहिए।
नहीं दिया दो दिन का समय
बचाव पक्ष के अधिवक्ता एन. हरीहरन ने कहा कि चौटाला को सरेंडर करने के लिए रविवार तक का समय दिया जाए। कोर्ट ने बचाव पक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि न्याय होने के अलावा न्याय होते हुए भी दिखना चाहिए। सरेंडर के लिए केवल एक दिन का समय दिया जा सकता है।
सीबीआई की विशेष अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा ने बचाव पक्ष की मांग पर आपत्ति करते हुए कहा कि चौटाला को आज ही सरेंडर करने के लिए कहा जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो आम आदमी को लगेगा कि पावरफुल लोग बचकर निकल जाते हैं।