महिंदर के अनुसार यदि उनकी पत्नी व बच्चे को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता? अगर उनकी पत्नी कोरोना पॉजिटिव थी तो नवजात शिशु का कोविड टेस्ट क्यों नहीं किया गया। सच तो यह है कि सिविल अस्पताल के डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए हमसे ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे हम अछूत हों। महिंदर ने इस घटना की शिकायत एसएमओ व डायल-104 पर कर कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टर नहीं, स्वजनों की लापरवाही : डॉ. चरणजीत
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. चरणजीत सिंह का कहना है कि महिला के स्वजनों ने ही लापरवाही का प्रमाण दिया है। गर्भवती महिला के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उसे गुरु नानक देव अस्पताल स्थित आइसोलेशन सेंटर में ही भेजा जाता है, क्योंकि वहां कोरोना उपचार की हर सुविधा है।
डॉक्टरों ने सुमन की डिलीवरी कर दी, क्योंकि उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी। महिंदर को इस बात की जानकारी हमने डिलीवरी से पहले ही दे दी थी कि उसकी पत्नी सुमन कोरोना पॉजिटिव है। जब उसकी कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई तो डायल-108 एंबुलेंस भी मंगवा दी, ताकि उसे गुरु नानक देव अस्पताल पहुंचाया जा सके, मगर परिवार वाले कह रहे थे कि हम वहां नहीं जाना चाहते।
डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोरोना पॉजिटिव सुमन को गायनी वार्ड में नहीं रख सकते थे। यहां 50 से अधिक गर्भवती महिलाएं उपचाराधीन हैं। इसलिए नियमानुसार ही सुमन को गुरु नानक देव अस्पताल भेजा जा रहा था। उसके नवजात शिशु का सैंपल भी गुरु नानक देव अस्पताल में लिया जाना था।