चंडीगढ़ में डेंगू की वजह से स्थिति अनियंत्रित हो चुकी है। प्रतिदिन 20 से 25 नए मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग बचाव व राहत कार्य के नाम पर पूर्व के वर्षों से 100 गुना ज्यादा काम करने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर का लगभग प्रत्येक क्षेत्र हॉट स्पॉट बन चुका है। प्लेटलेट्स की कमी के कारण मरीजों के परिजन यहां-वहां भटक रहे हैं। स्थिति भयावह होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसके इलाज के प्रोटाकॉल तक लागू नहीं कर पाया है। ब्लड बैंकों में खून की कमी के चलते अन्य मर्ज का इलाज करना मुश्किल हो रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि डेंगू के मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड नहीं बचे हैं। मानकों को दरकिनार कर स्ट्रेचर पर भर्ती कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा विभाग कोरोना और डेंगू से बचाव के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की बढ़ी मांग
डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच- 16 के ब्लड बैंक में खून की कमी की नौबत आ चुकी है, जिसे दूर करने के लिए संस्थाएं लगातार रक्तदान शिविर आयोजित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेटलेट्स देने के लिए विभाग की ओर से मानक तय न होने के कारण स्थिति बेकाबू हो रही है। जिसे जरूरत नहीं, उसे प्लेटलेट्स दिया जा रहा है और जिसे जरूरत है वे उसकी कमी से जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहा है।
कर्मचारियों की कमी बनी परेशानी का सबब
स्वास्थ्य विभाग वर्षों से खाली पड़े नियमित पदों को भरने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। ऐसे में एनएचएम के 178 कर्मचारियों को निकाले जाने से व्यवस्था पर ज्यादा असर पड़ा है। हालांकि प्रशासन ने निकाले गए सभी कर्मचारियों को पुन: नौकरी पर रखने का निर्णय लिया है, लेकिन प्रक्रिया अभी जारी है। वहीं दूसरी तरफ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग 373 पदों में से 124 खाली पड़े हैं। इनमें मुख्य रूप से सीनियर लैब टेक्नीशियन के चार, मेडिकल लैब टेक्नीशियन के 13, डेंटल टेक्नीशियन के दो, डार्क रूम असिस्टेंट के सभी तीन पद, रेडियोग्राफर के छह, पोस्टमार्टम असिस्टेंट का एक, ईसीजी टेक्नीशियन के तीन, लिपिक के 14, फार्मासिस्ट के 29, एएनएम के 19 और फूड सेफ्ट ऑफिसर के 2 पद शामिल हैं।
- शहर में अब तक मिल चुके हैं डेंगू के 1354 मरीज
- अप्रैल में मिला था पहला मरीज
- जीएमएसएच- 16 में डेंगू के मरीजों के लिए 20 बेड आरक्षित
- जीएमसीएच- 32 से संबंद्ध सेक्टर- 48 के अस्पताल में 100 बेड आरक्षित
- पीजीआई में अलग से नहीं बनाया गया डेंगू वार्ड, रेफर मरीजों का इमरजेंसी में भर्ती कर हो रहा इलाज
शहर के ये इलाके बने हॉट स्पॉट
सेक्टर- 52, 45, 22, 15, मनीमाजरा, मौलीजागरां, मलोया, किशनगढ़, खुड्डाअलीशेर, कझहेड़ी, बापूधाम, दरिया, धनास, हल्लोमाजरा और बुड़ैल।
यहां है जांच की सुविधा
पीजीआई, जीएमसीएच- 32, सिविल अस्पताल मनीमाजरा, सिविल अस्पताल सेक्टर- 22 और सिविल अस्पताल- 45 में।
मदद चाहिए तो इस पर करें कॉल
फॉगिंग, एंटी लार्वा या मच्छरजनित बीमारियों से संबंधित लापरवाही या अनदेखी से संबंधित सूचना या शिकायत इस नंबर 76260-02036 पर कॉल कर दी जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की कागजी कार्रवाई
लापरवाही पर चालान- 477
नोटिस जारी- 10390
कारण बताओ नोटिस- 335
घरों का सर्वे- 681757
कूलर की जांच- 1,69,400
कंटेनर की जांच- 10,08,384
ओवर हेड टेंक की जांच- 4,43,342
ऐसे बढ़ी डेंगू की रफ्तार
अप्रैल- 1 केस
मई- 1
जून- 1
जुलाई- 3
अगस्त - 6
सितंबर- 56
अक्तूबर- 893
नवंबर में अब तक-1354
डेंगू से बचाव केलिए व्यापक स्तर पर राहत व बचाव कार्य किये जा रहे हैं। परिणामत: डेंगू के मामले धीरे-धीरे कम होने लगे हैं। - डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य