टैगोर थिएटर में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से ‘नुगरा का तमाशा’ नाटक का मंचन हुआ। इस नाटक का मंचन नई दिल्ली के थिएटर ग्रुप कला मंडली के कलाकारों ने किया। नाटक की कहानी अलबेला नाम के ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके माता-पिता अंधविश्वास के कारण चार वर्ष की आयु में ही उसका विवाह कर देते है। वह बेटा उन्हें काफी समय बाद प्राप्त होता है।
इसलिए वह उसका भविष्य जानने के लिए ज्योतिष के पास जाते हैं। हाथ देखने पर ज्योतिष बताता है कि अगर अलबेला ने 22 साल से पहले किसी कुंवारी स्त्री का चेहरा देखा तो उसे सांप डस लेगा। डर के मारे अलबेला के माता-पिता उसकी छोटी आयु में विवाह कर देते है।
22 साल के बाद जब वह दुल्हन लेकर ससुराल से निकलता है तो रास्ते में देखता है कि एक सांप को कालबेलिया (सपेरा) पकड़ रहा है। वह उसे सांप को टोकरी में बंद देता है। लेकिन अलबेला उसे मुक्त करा देता है। जब सांप मुक्त हो जाता है तो वह अलेला को डसने के लिए आतुर होता है।
अलबेला उसे भोले बाबा की सौगंध देता है तो सांप उसे सात दिन तक जिंदा रहने का समय दे देता है। सात दिन के बाद अलबेला की पत्नी सांप से पति के प्राणों की रक्षा के लिए आती है और लाख मिन्नतें करती है। इसके बाद भी सांप का दिल नहीं पसीजता है। आखिरकार एक सियार आता है और सांप को धोखे से डिब्बे में बंद कर देता है।
इसके बाद वह अलबेला से सांप को मारने को कहता है। लेकिन कहानी में नया मोड़ आता है जब एक बच्चा अलबेला से कहता है सांप एक जीवित प्राणी है। उसे भी जीने का अधिकार है। अगर मारना चाहते हो तो अपने अंदर के सांप को मारो। यही संदेश देते हुए नाटक समाप्त हो जाता है। इस नाटक को सुमन कुमार ने निर्देशित किया है।