इस महिला का हौंसला देखिए, जिसे आजीविका कमाने के लिए रिक्शा चलाने से भी गुरेज नहीं है। इसकी इसी लग्न ने इसे विदेशों तक पापुलर कर दिया। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है वाशिंगटन के एक एनआरआई ने। उसने मुक्तसर निवासी एक महिला रिक्शा चालक के लिए 600 डॉलर (करीब 36 हजार रुपये) की मदद भेजी है।
यही नहीं, वह भी गुप्त दान। किसी को मदद देना और अपनी पहचान छुपाए रखना बहुत बड़ी बात है। नहीं तो आज के दौर में अखबारों में तस्वीरें छपवाने मात्र के उद्देश्य से मदद करने वाले मददगारों की भी कमी नहीं है। ऐसे गुप्तदान करने वाले मददगार एनआरआई ही सचमुच में जरूरतमंदों के मसीहा साबित हो सकते हैं।