बाजार में उपलब्ध सभी हेलमेट सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं हैं। यहां तक कि सड़कों के किनारे धड़ल्ले से बिकने वाले हेलमेटों पर मानक ब्यूरो का निशान आईएसआई भी असली नहीं होता।
लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने हेलमेट के सुरक्षा मानकों और असली-नकली लोगो की पहचान के लिए विस्तृत जानकारी जारी की है।
भारतीय मानक ब्यूरो के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से हेलमेट खरीदने वालों के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है।
इस एडवाइजरी के साथ चित्र भी हैं ताकि लोग असली और नकली का फर्क समझ सकें।
ऐसे पहचाने असली मार्क
भारतीय मानक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक असली आईएसआई मार्क को पहचाना बहुत आसान है।
असली मार्क के ऊपर भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड का नंबर होगा और नीचे सीएम/एल यानी उस उत्पाद के लिए कंपनी को जारी लाइसेंस नंबर होगा।
पूरे देश में इसी स्टैंडर्ड का हेल्मेट मार्केट में उतारा जाता है। नकली आईएसआई मार्का में लाइसेंस नंबर नहीं होगा। यह कंपनी का होता है।
उन्होंने बताया कि असली आईएसआई मार्का लेने के लिए कंपनी को ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरना होगा। ब्यूरो से स्वीकृति मिलने के बाद ही आईएसआई मार्क दिया जाता है।
यह एक हेलमेट की कसौटी
कंडीशनिंग टेस्ट : हेलमेट को 50 डिग्री के तापमान पर चार घंटे के लिए रखा जाता है और फिर इतने ही समय माइनस 20 डिग्री के तापमान पर रखा जाता है।
अल्ट्रावाइलट रेडियशन चैक : 48 घंटे तक 125 वाट के जिनोफाइड लैंप की रोशनी में रखा जाता है।
नमी का परीक्षण : चार घंटे पानी के तेज बहाव में रखा जाता है।
आघात परीक्षण : पांच किलोग्राम का भार ढाई मीटर की ऊंचाई से पूरी ताकत से डाला जाता है।
उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय बीआईएस, चंडीगढ़ के उपमहानिदेशक एके सैनी ने बताया कि दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि वे ऐसे हेलमेट पहनें जो सभी मानकों पर खरे हों। हादसों में ज्यादातर मौत सिर की चोट से ही होती है। इसलिए हेलमेट खरीदते समय यह जरूर देख लें कि आईएसआई मार्क असली है या नहीं।