पीजीआई में कई सालों से एक ही सीट पर जमे क्लर्कों के ट्रांसफर के आदेश बुधवार को जारी किए गए हैं। इससे क्लर्कों में हड़कंप मच गया है। पीजीआई की यूनियनों व अन्य लोगों ने कई बार पीजीआई प्रशासन से गुहार लगाई थी कि इन क्लर्कों को बदला जाए। जब सुनवाई नहीं हुई तो यूनियन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने मुद्दा उठाया।
उसके बाद जनवरी में यूनियन और स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी के बीच एक मीटिंग भी हुई थी। मीटिंग में तय हुआ कि तीन साल से लेकर आठ साल से ज्यादा समय तक एक ही सीट पर बैठे क्लर्क का ट्रांसफर कर दिया जाए। ज्वाइंट सेक्रेटरी ने इस संबंध में पीजीआई को जनवरी में ही निर्देश जारी कर दिए थे, लेकिन पीजीआई के अधिकारी अपने करीबी क्लर्क को हटाने में हिचकते रहे।
अब यह तय किया गया कि पहले फेज में आठ साल से ऊपर तक जमे रहने वाले क्लर्कों को ट्रांसफर किया जाएगा। दूसरे फेज में पांच साल और तीसरे फेज में तीन साल तक एक ही जगह पर बैठे क्लर्कों को ट्रांसफर किया जाएगा।
इनका हुआ ट्रांसफर
अकाउंट ब्रांच के धर्मवीर, डीबी थापा, चंचल शर्मा, मनोरमा भट्ट, मंजीत कौर, वीना रानी, डीडीटीसी व साइक्रेट्री डिपार्टमेंट सुमन पत्याल, हिंदी सेक्शन के देव सिंह, हिस्पैथोलॉजी के बलजीत कौर, इम्यूनोपैथोलॉजी के चरणजीत कौर, नाइन वी गोपाल कृष्णन, पल्मनरी मेडिसिन के रूप सिंह, रेडियोथैरेपी के हरजीत सिंह, ट्रेनिंग ब्रांच के हरिंदर सिंह, रंजीत सिंह, वेलफेयर डिपार्टमेंट के धुनी चंद व सुभान सिंह, बायोस्टेटिस्टीक्स के चीनू सचदेवा, एस्टेट ब्रांच के मलकीत चंद, रीक्रूटमेंट सेल राजेंदर कुमार, एमएस आफिस राजकुमार, इस्टेब्लिशमेंट ब्रांच के सचिन शर्मा व तरणदीप सिंह।
अब भी जमे हैं कई लोग
बताया जा रहा है कि पीजीआई में अब भी कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो दस सालों से एक ही विभाग में जमे हैं, लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं किया गया है। आरोप है कि इस्टेब्लिशमेंट ब्रांच-1 के अशोक व मुनीष भी कई सालों से एक ही सीट पर जमे हैं, लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं किया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह तो शुरुआत हुई है। जल्द ही अन्य क्लर्कों का भी ट्रांसफर किया जाएगा।