उसके पास चार से पांच क्लाइंट हैं। दफ्तर में पहली बार वह फरवरी के महीने में तीन से चार लोगों के साथ आया था। उसके पास तीन से चार लाइसेंस के आवेदन थे।
उस दौरान उसे मना कर दिया गया था कि वह किसी दूसरे की आवेदन लेकर न आए। जिसके नाम का लाइसेंस लेना है, केवल उसे ही लेकर आए। किसी थर्ड पार्टी के दखल देने से लाइसेंस नहीं बनता। यह गैरकानूनी भी है।
शिकायत के मुताबिक 22 फरवरी को वह जबरदस्ती दफ्तर में घुस गया और धमकी देने लगा कि मैं आपका आफिस में बैठना मुश्किल कर दूंगा। इससे सारिका काफी डर गईं। उसके बाद बृजेंद्र मंगलवार को दफ्तर में पहुंचा।
सारिका के मुताबिक मंगलवार को वह ऑफिस परिसर में फोन कर रही थीं, तभी वह बृजेंद्र आ गया और घूरने लगा। उसके साथ एक व्यक्ति और था, जो मोबाइल से उनकी वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा था।
उसके बाद वह उनके पीछे चल पड़ा। उन्हें कुछ गलत लगा और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना तुरंत डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज को दी। उन्होंने तुरंत सिक्योरिटी और पुलिस फोर्स को भेजा।
पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ ले गई। उधर, सेक्टर-17 पुलिस का कहना है कि उसने दोनों आरोपियों के खिलाफ धमकी देना और गलत इरादे से रोकने का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डा. जी दीवान ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर की सूचना मिलने पर सिक्योरिटी और पुलिस की टीम भेज दी गई थी। दफ्तर के बाहर सिक्योटिरी हर वक्त रहती है।