चंडीगढ़। अब रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को अपने क्षेत्र के पार्कों को मेंटेन के लिए लेने से पहले क्षेत्रीय पार्षद की सहमति लेनी होगी। उसी के बाद निगम उन्हें पार्क देगा। शुक्रवार को सदन की बैठक में निगम ने कहा कि एक आरडब्ल्यूए कई पार्क मेंटेन के लिए ले लेता है और फिर उसकी देखभाल नहीं करता। सदन ऐसी पॉलिसी बनाए जिसमें एक आरडब्ल्यूए को तीन से ज्यादा पार्क न मिलें। पार्षदों ने कहा कि लोगों के लिए बंदिश न रखी जाए। पार्षद और अफसरों की टीम क्षेत्र में निरीक्षण करेगी, जिसका पार्क मेंटेन नहीं होगा उससे तत्काल अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा।
पार्षद दमनप्रीत सिंह ने कहा कि उनके वार्ड में एक एसोसिएशन ने देखभाल के लिए 57 पार्क लिए हैं। उन्होंने पार्क को कितना मेंटेन किया है इसे देखने कोई नहीं आया। पार्कों की हालत बदहाल है। आप पार्षद प्रेमलता ने भी इस पर सहमति जताई। आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि इसमें पार्कों की संख्या को घटा या बढ़ा सकते हैं, लेकिन कोई नंबर तय हो जायेगा तो पॉलिसी बन जाएगी। कुछ पार्षदों ने कहा कि पार्कों की संख्या 10 कर देते हैं तो डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि उनके वार्ड में कुल 10 पार्क हैं, वहां यह पॉलिसी काम नहीं करेगी। सदन ने तय किया कि जहां आरडब्ल्यूए नहीं है वहां के पार्कों को निगम खुद मेंटेन करेगा।
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पायलट प्रोजेक्ट की तर्ज पर एक सेक्टर का पार्क होगा निजी हाथों में
नगर निगम सदन में एजेंडा लेकर आया कि शहर में कुल 1800 नेबरहुड पार्क हैं। इसमें 713 को आरडब्ल्यूए और 100 बड़े पार्कों को नगर निगम मेंटेन करता है। बचे हुए पार्कों को मेंटेन करने के लिये कोई आगे नहीं आ रहा है। निगम ने इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक सेक्टर के पार्कों को निजी हाथों में देकर व्यवस्थित करने की योजना बनाई है। यह योजना सफल रही तो सदन की सहमति से आगे के सेक्टरों में काम कराया जाएगा। काम की संतुष्टि के लिए क्षेत्रीय पार्षद से भी सहमति पत्र लिया जाएगा। इसमें एक साल के टेंडर के साथ ही तीन साल तक काम के आधार पर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। सदन ने इसे सहमति दे दी।
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बागवानी के कचरे के निस्तारण के लिये लगेगी 349.45 मशीन
नगर निगम सदन में बागवानी के कचरे के निस्तारण के लिए 3बीआरडी में 349.45 लाख रुपये की लागत से मशीन लगाने का प्रस्ताव सदन में रखा। इसमें बताया गया कि मशीन प्रतिदिन 30 से 40 टन बागवानी का कचरा निस्तारित करेगी। इसके लिए दफ्तर, शेड, शौचालय और लाइट की व्यवस्था करनी होगी। छह माह में इस प्लांट को बनाकर तैयार किया जायेगा। सदन ने इस पर सहमति दे दी।