अब शहर में गाय के गोबर से बिजली भी बनेगी। नगर निगम ने बिजली बनाने वाले बायो गैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है, जिसकी लागत 4 करोड़ रुपये है। इस प्लांट में प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन गोबर को प्रोसेस किया जा सकता है। अभी तक शहर में गोबर लोगों और नगर निगम के लिए सिरदर्दी बना हुआ है क्योंकि कई बार गोबर से सीवरेज जाम हो चुका है।
मेयर आशा जसवाल के सुझाव पर यह प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। यह प्लांट गौशाला के आसपास ही लगेगा। शहर में तीन गौशालाएं हैं, जो कि सेक्टर-45, गांव मलोया और सेक्टर-25 में हैं। यह तीनों ही गौशालाएं एनजीओ और धार्मिक संगठनों की ओर से चलाई जा रही हैं। यह गौशालाएं भी गोबर के निपटारे की मांग नगर निगम से कर चुकी हैं। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में दो कैटल पाउंड भी हैं, जिसमें 750 पशु हैं। सभी गौशालाएं और कैटल पाउंड मिलाकर कुल ढ़ाई हजार पशु इनमें हैं। ऐसे में 2500 कैटल से प्रतिदिन 15 हजार(15 मीट्रिक टन) गोबर निकलता है।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार ई टेंडर प्रक्रिया की ओर से प्लांट लगाने के लिए बिड मंगवाई जाएगी। प्लांट लगाने के लिए जमीन नगर निगम की ओर से ही कंपनी को उपलब्ध करवाई जाएगी। प्लांट को चलाने, रखरखाव, इकट्ठा करना और ट्रासपोर्ट का काम कंपनी ही 5 साल तक संभालेगी। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि प्लांट लगने से जहां गोबर की दिक्कत दूर हो जाएगी वहीं बिजली पैदा होगी। साथ ही कमाई भी बढ़ेगी।