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पंजाब की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तैयारी, अकाली दल इस चेहरे पर खेल सकती है दांव

Sun, 23 Jun 2019 04:04 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब पंजाब में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का मंच सजने की तैयारी शुरु हो गई है। यह दो विधानसभा सीटें-जलालाबाद और फगवाड़ा (रिजर्व), अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के फिरोजपुर और भाजपा के सोमप्रकाश के होशियारपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतने के बाद खाली हुई हैं। 

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दो सीटों पर विधायक जीत कर सांसद बने है। सुखबीर बादल जलालाबाद से और सोमप्रकाश फगवाड़ा से विधायक थे। दोनों ने सांसद बनने के साथ ही विधायक पद से इस्तीफे विधानसभा स्पीकर को भेज दिए थे, जो मंजूर भी किए जा चुके हैं।

इन दो विधानसभा सीटों के अलावा छह अन्य सीटें जिन पर आम आदमी पार्टी के बागी विधायक काबिज हैं, के जल्द खाली होने के कयास भी लगाए जा रहे थे क्योंकि इन छह विधायकों के इस्तीफे स्पीकर के पास विचाराधीन हैं। लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बयान में साफ कर दिया कि लोकसभा चुनाव से खाली हुई दो विधानसभा सीटों पर पहले उपचुनाव कराए जाएंगे। 
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नियमानुसार, इन दोनों सीटों पर अगले छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाने जरूरी हैं। इसके लिए चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी। दूसरी ओर, पंजाब में सत्तासीन कांग्रेस इन दो खाली सीटों पर जीत हासिल करने के लिए जोड़तोड़ में अभी से जुट गई है। हालांकि जलालाबाद सीट लंबे समय से अकालियों का गढ़ रही है। 

इस सीट पर शेर सिंह घुबाया अकाली दल के टिकट पर 1997-2002 तक और 2007-2009 तक विधायक रहे। 2002 में घुबाया कांग्रेसी प्रत्याशी जोसन से हार गए लेकिन 2009 में सुखबीर बादल ने इस हलके से चुनाव लड़ा और सीट अकाली दल के खाते में जोड़ दी। इसके बाद भी सुखबीर 2012 और 2017 में इसी सीट से जीते। लेकिन अब सुखबीर की जगह अकाली दल किसे प्रत्याशी बनाएगा, इस पर अटकलें शुरु हो गई हैं।

फिलहाल यह संकेत मिले हैं कि अकाली दल जगमीत सिंह बराड़ को इस सीट पर उतार सकता है। वहीं, लंबे समय से इस हलके में निष्क्रिय रही कांग्रेस को अपने प्रत्याशी की तलाश करनी होगी। उधर, आम आदमी पार्टी ने भी अपने नेताओं से रिपोर्ट जुटानी शुरू कर दी हैं। यह रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को भेजी जाएगी, जिसके बाद फैसला लिया जाएगा कि पार्टी जलालाबाद और फगवाड़ा में अपने प्रत्याशी उतारे या नहीं।

फगवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के लिए वाल्मीकि समाज ने कांग्रेस पर अभी से दबाव बनाना शुरु कर दिया है। इस सीट पर 2017 के चुनाव में सोमप्रकाश के हाथों हारे जोगिंदर सिंह मान को कांग्रेस से इस बार टिकट मिलने के कोई आसार नहीं हैं। वहीं लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा प्रदेश की चारों सीटों पर रविदासिया समाज को टिकट दे दिए जाने से नाराज वाल्मीकि समाज अब फगवाड़ा की विधायकी के लिए अपना दावा जता रहा है। 
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फतेहगढ़ साहिब सीट पर तो कांग्रेस प्रत्याशी के बहिष्कार का भी समाज ने ऐलान कर दिया था। तब कैप्टन ने खुद स्थिति संभाली और समाज को भरोसा दिलाया कि आधी यानी दो सीटों के बदले समाज के दो नेताओं को चेयरमैनी दी जायेगी।

इस पर समाज राजी हुआ और फतेहगढ़ साहिब से अमर सिंह की जोरदार जीत पार्टी की झोली में डाल दी। उल्लेखनीय है कि समाज के जिन दो प्रतिनिधियों को चेयरमैन बनाया जाना है, उनमे अश्विनी भी हैं। माना जा रहा है कि उन्हें फगवाड़ा से टिकट देने पर भी विचार हो सकता है।

सूबे की पांच और विधानसभा सीटें होनी हैं खाली
आम आदमी पार्टी (आप) के बगावत करने वाले और पार्टी से किनारा कर गए कुल पांच विधायकों के इस्तीफे विधानसभा स्पीकर के विचाराधीन हैं। इन पर फैसला आते ही राज्य की पांच और विधानसभा सीटों- दाखा, भुलत्थ, जैतों, मानसा और रोपड़ में उपचुनाव की भूमिका बन जाएगी।

इनमें पार्टी और दाखा की विधायकी से इस्तीफा दे चुके एचएस फूलका, पार्टी से बगावत कर अपनी पार्टी का गठन कर चुके भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा, उनका साथ दे रहे जैतों से विधायक बलदेव सिंह, आप छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए मानसा से विधायक नाजर सिंह मानशहिया और रोपड़ से विधायक अमरजीत सिंह संदोआ के इस्तीफों पर फैसला पेंडिंग है। 
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