फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को मुफ्त में दिया जाएगा प्लस ऑक्सीमीटर

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में कोरोना के बढ़ते मृत्युदर पर काबू न लगने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। इस समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ विभाग ने बचाव की रणनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसके अंतर्गत कोरोना पॉजिटिव गंभीर मरीजों पर विशेष नजर रखने के साथ ही लापरवाही बरतने वाले मरीजों को उनके निर्णय न होने के बावजूद अस्पताल लाने जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है। निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि पॉजिटिव केस पर नियंत्रण मिल रहा है, लेकिन मृत्यु दर कम करने में सफलता नहीं मिल पा रही। इसका मुख्य कारण यह है कि कोरोना के गंभीर मरीज स्वास्थ विभाग का सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए होम आइसोलेशन में रह रहे गंभीर मरीजों पर विशेष नजर रखने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही आर्थिक स्थिति के मानकों को दरकिनार कर सभी गंभीर मरीजों को नि:शुल्क पल्स ऑक्सीमीटर दिया जा रहा है ताकि ऑक्सीजन की कमी के कारण जान जाने जैसी स्थिति सामने न आने पाए।
विज्ञापन

बॉक्स
तीन वर्ग में बांटा गंभीर मरीजों को
गंभीर मरीजों के बढ़ते मृत्यु दर पर काबू के लिए स्वास्थ विभाग में कोरोना के मरीजों को तीन वर्गों में बांटा है। इन तीनों वर्गों में गंभीर मरीजों को ही शामिल किया गया है, जिसमें 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के पॉजिटिव मरीज, पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज और लक्षणों वाले कोरोना के मरीजों को शामिल किया गया है। डॉ. कंग ने बताया कि इन तीनों वर्गों में शामिल मरीजों को देने के लिए क्षेत्र के मेडिकल ऑफिसर को पल्स ऑक्सीमीटर दे रहे हैं। इसके लिए जोनल इंचार्ज को दो-दो सौ पल्स ऑक्सीमीटर का स्टॉक दे दिया गया है। डॉ. कंग ने बताया कि 3 वर्ग में शामिल मरीजों को इस बात का बेहद गंभीरता से ध्यान रखना होगा कि उनके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा 95 प्रतिशत से नीचे ना आए। इसके नीचे का ऑक्सीजन स्तर उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इससे बचाव के लिए ही स्वास्थ विभाग ने उन्हें प्लस ऑक्सीमीटर देने का निर्णय लिया है। मशीन देने के साथ ही मरीजों को ऑक्सीजन लेवल जांचने की जानकारी भी दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की मात्रा 95 से नीचे आने पर तत्काल विभाग को सूचना दें और खुद को जीएमएसएच 16 में भर्ती कराए।
बॉक्स
घर जाकर लिया जाएगा खून का नमूना
कोरोना से मरने वाले मरीजों में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लगभग 85 प्रतिशत मरीज शामिल है। ऐसे में जरूरी है कि गंभीर बीमारी वाले पॉजिटिव मरीजों पर विशेष नजर रखी जाए। डॉक्टर कंग ने बताया कि इस स्थिति से बचाव के लिए उन्होंने डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर जांचने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम को घर जाकर सैंपल लेने का निर्देश दिया है। डॉ. कंग ने बताया कि कोमॉर्बिड ज्यादातर मरीज अस्पताल आने को तैयार नहीं है। ऐसे में घर पर उनका उचित फॉलो करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि उनके घर पर जाकर उनके ब्लड शुगर का लेवल जांचा जाए। इसके लिए प्रत्येक टीम को ग्लूकोमीटर दे दिया गया है। इसके अलावा बीपी की मशीन भी दी गई है ताकि मरीज में ऑक्सीजन के साथ ही बीपी और ब्लड शुगर की स्थिति बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित की जा सके।
विज्ञापन

बॉक्स
लापरवाह मरीजों को लाया जाएगा अस्पताल
डॉ. कंग ने बताया कि कोरोना से मृत्यु दर पर काबू के लिए अब उन मरीजों पर विशेष नजर रखी जाएगी जो होम आइसोलेशन में रहने के दौरान लापरवाही बरत रहे हैं। होम आइसोलेशन वाले उन कोमॉर्बिड मरीजों को अस्पताल लाया जाएगा जो उचित तरीके से किसी फिजीशियन की फॉलोअप में नहीं है । डॉ कंग ने बताया कि जो मरीज किसी डॉक्टर के फालोअप में होंगे उन्हें ही होम आइसोलेशन में रहने की अनुमति दी जाएगी क्योंकि उनके जिद के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें