नई शर्तों के साथ पढ़ी-लिखी पंचायत चुनी गई तो सरकार भी उनका पूरा फायदा उठाना चाहती है। यही कारण है कि अब हर गांव की अलग वेबसाइट बनाई जाएगी, जिन पर सभी विकास कार्यों समेत अन्य ब्योरा भी होगा। वहीं, सभी गांवों के नाम से ई-मेल आईडी होगी, जिन पर सीएम सीधे ई-मेल करेंगे।
किसी भी सरपंच को पत्र नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उनको ई-मेल से सभी जानकारियां मिलेंगी। सीएम, पंचायत मंत्री, पंचायत विभाग के कार्यालयों में वह ई-मेल आईडी दर्ज होगी। यही नहीं, सरपंचों को अप्रैल में पांच साल का प्लान भी कंप्यूटर के सहारे ही शासन को भेजना होगा।
विकास एवं पंचायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू ने बताया कि सरपंचों को अब ट्रेनिंग दी जाएगी, जिनमें सरकारी योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। उनको कंप्यूटर की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे वे अपने गांव की वेबसाइट पर सबकुछ देख सकें और अपना ई-मेल खुद चला सकें।
सरपंच अपने ई-मेल के सहारे सीधे सीएम, मंत्री, पंचायत विभाग या अन्य किसी अधिकारी से जुड़ सकेंगे। इससे उनको दौड़ भी नहीं लगानी पड़ेगी और उनका काम भी हो जाएगा। इस तरह पंचायतों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत किया जा रहा है।