आतंकियों और दुश्मन के खिलाफ सेना का प्रहार अब और खतरनाक होगा। सेना अब घाटी और नार्थ-ईस्ट राज्यों में चल रहे अपने विशेष सैन्य अभियानों में भाग लेने वाले जवानों को सेमी आटोमैटिक ‘40 एमएम मल्टी शूट ग्रेनेड लॉन्चर’ से लैस करेगी। पहले इस लांचर का इस्तेमाल सेना बहुत ही कम होता था। मगर बढ़ती आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर सेना अब अपने विशेष अभियानों में इस हथियार को अपनी ताकत और बढ़ाने जा रही है। सेना का मानना है कि इससे घाटी में आतंक और घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे सेना के स्पेशल ऑपरेशन ‘ऑल आउट’ की ताकत और बढ़ेगी।
इस ग्रेनेड लॉन्चर की खास बात यह कि ये हथियार आतंकियों के झुंड, उनके अस्थायी अड्डों, बख्तरबंद गाड़ियों और दुश्मनों के बंकरों के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। घाटी में बने मौजूदा हालातों को देखते हुए सेना अपने स्पेशल आपरेशन में शामिल होने वाले जवानों को इस एडवांस हथियार से लैस करने जा रही है। घाटी का वे जंगलात इलाके जहां आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं और घुसपैठ सबसे ज्यादा है, वहां तैनात जवानों को ये लॉन्चर उपलब्ध करवाएं जाएंगे। ताकि आतंकियों पर प्रहार प्रबल हो सके। ये लॉन्चर साउथ अफ्रीका की तकनीक पर आधारित है।
375 मीटर तक रेंज, 10 मीटर तक कीलिंग एरिया
- इस ग्रेनेड लॉन्चर को एक जवान आसानी से उठा चल और इसका इस्तेमाल कर सकता है
- दुश्मन के बंकर को उड़ाने के लिए पास जाने की जरूरत नहीं, इससे निशाना लगाकर बंकर दूर से ही उड़ाया जा सकता है
- रेंज 30 मीटर से लेकर 375 मीटर, 10 मीटर तक कीलिंग एरिया और प्रैक्टिकल रेट ऑफ फायर 18 राउंड प्रति मिनट
- घाटी में काउंटर विद्रोह और कम तीव्रता वाले संघर्ष को काबू करने के लिए एक आदर्श हथियार
ग्रेनेड लॉन्चर में चलेंगे चार तरह के बारूद
इस सेमी आटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर में चार तरह का बारूद इस्तेमाल हो सकता है। इन बारूदों में हाई एक्सप्लोसिव (एचई), हाई एक्सप्लोसिव एंटी पर्सनल (एचईएपी), हाई एक्सप्लोसिव ड्यूल पर्पस (एचईडीपी) और स्मॉक शामिल है। ये बारूद पतली चादर की बख्तर बंद गाड़ियों, बंकरों और लोगों के समूह को दूर से ही उड़ाने में सक्षम हैं।