पांच लाख लोगों के लिए बने चंडीगढ़ की आबादी अब 14 लाख की संख्या पार कर चुकी है। ऐसे में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में सभी लोगों के लिए घर की जरूरत पूरी कर पाना चुनौती भरा काम होगा।
इसी दिक्कत को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान में भविष्य में बनने वाली सभी बिल्डिंग को चार से छह मंजिला बनाने का सुझाव दिया गया है।
हकीकत यह है कि पहले से लांच की गई कई हाउसिंग स्कीम फ्लॉप हो चुकी हैं। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा 2008 में चार हजार फ्लैट के लिए लकी ड्रा निकाला गया था, लेकिन बाद में प्रशासन ने इन फ्लैट के लिए जमीन नहीं होने का हवाला देते हुए लकी ड्रा में सफल उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
सेक्टर-63 में कई वर्षों से हाउसिंग फ्लैट का निर्माण कार्य अधर में लटका है। चंडीगढ़ में जमीन की कमी को देखते हुए मास्टर प्लान में साथ लगते राज्यों पंचकूला और मोहाली में नई हाउसिंग स्कीम तैयार कर चंडीगढ़ का बोझ कम करने का सुझाव दिया गया है।
मास्टर प्लान के अनुसार, चंडीगढ़ में 75 फीसदी मकान प्राइवेट हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए 1 से 13 कैटेगरी के 11 हजार मकान हैं। मास्टर प्लान में इनकी संख्या 25 हजार करने का प्रपोजल है। वीआईपी सेक्टर 1 से 7 तक सरकारी मकानों में किसी तरह के बदलाव नहीं करने का सुझाव दिया गया है।
सीएचबी भी बनाएगा छह मंजिला मकान
मास्टर प्लान के अनुसार, 1976 में बने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) को 215 एकड़ जमीन हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए अलॉट की गई थी। इस समय सीएचबी के पास 146 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। मास्टर प्लान 2031 के अनुसार, सीएचबी अब सिर्फ चार और छह मंजिला मकान तैयार करेगा। मास्टर प्लान में चंडीगढ़ में प्लाट आवंटन की स्कीम को खत्म कर सिर्फ मल्टीस्टोरी फ्लैट्स बनाने की बात कही गई है।
स्लम फ्री बनाने के लिए बनेंगे 25 हजार मकान
मास्टर प्लान में शहर को स्लम फ्री बनाने पर जोर दिया गया है। शहर में अवैध कालोनियों को हटाकर 25,728 स्मॉल फ्लैट बनाने का लक्ष्य है। शहर के आठ विभिन्न सेक्टर में फ्लैट बनाए जाएंगे।
सीएचबी 13 हजार मकान तैयार कर चुका है, लेकिन सीएचबी द्वारा तैयार सिंगल रूम फ्लैट्स का जमकर विरोध हुआ है। भविष्य में ईडब्ल्यूएस मकान दो कमरों के होंगे।
मास्टर प्लान में ये सुझाव भी
- शहर में पढ़ने के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले स्टूडेंट्स और वर्किंग वुमन के लिए नए हॉस्टल बनाए जाएंगे।
- सभी हाउसिंग स्कीम के तहत कम से कम 15 फीसदी मकान ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए रिजर्व रखने जरूरी हैं।
- प्लान के तहत मनीमाजरा की कुल 346 एकड़ जमीन के बाद अब और रिहायशी जगह के लिए जमीन नहीं बची है।
- रिक्शा चालकों के लिए शहर में रिक्शा स्टैंड और शेल्टर दिए जाने का प्लान तैयार किया गया है।
- शहर में नए ओल्ड एज होम बनाए जाएंगे।
- विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कर्मचारियों के लिए मकान तैयार किए जाएंगे।
- धनास-मुल्लापुर रोड पर 52.9 एकड़ में चंडीगढ़ आर्म्ड पुलिस (सीएपी) कांप्लैक्स का निर्माण किया जाएगा। विभिन्न कैटेगरी के 1458 मकान बनाए जाएंगे।
- सारंगपुर में 30 एकड़ जमीन को रेजिडेंशियल एरिया के लिए रिजर्व किया गया है।
- मलोया में 178 एकड़ जमीन पर भी रिहायशी मकान बनाए जाएंगे।
- शहर में कामकाज के लिए आने वाले माइग्रेंट्स के लिए रेंटल हाउसिंग स्कीम बनाई जाएगी।