26 जुलाई 1995 को मुख्य प्रशासक एचएसवीपी ने इस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अर्जी खारिज कर दी। 14 मार्च 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने एचएसवीपी चेयरमैन से प्लॉट की अलॉटमेंट बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को चेयरमैन एचएसवीपी ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉट में बहाली के लिए संभावनाएं तलाशने का आदेश जारी किया। लेकिन, कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ इनकार कर दिया।
18 अगस्त 2005 को फिर आवेदन मांगे गए
18 अगस्त 2005 को फ्रेश अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 28 अगस्त 2005 को भूपेंद्र सिंह हुड्डा हुड्डा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए। साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण कार्य शुरू करके एक साल में पूरा करने को भी कहा। सीए एचएसवीपी ने भी पुराने रेट पर प्लॉट अलॉट करने के आदेश दिए।
2016 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस
एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अखबार नेशनल हेराल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ प्लॉट आवंटन का आरोप है। इस मामले में सीबीआई ने मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। यह केस हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की शिकायत पर दर्ज हुआ था। क्योंकि मुख्यमंत्री एचएसवीपी के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह गड़बड़ी हुड्डा के कार्यकाल में हुई थी। इसलिए उनके खिलाफ केस दर्ज किया। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को करीब 62 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।