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'द्वितीय विश्वयुद्ध में मरने वाले सिपाहियों को शहीद का दर्जा नहीं दे सकते'

Thu, 17 Nov 2016 01:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कंज्यूमर कोर्ट
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भारत के लिए लड़ते हुए जान गंवाने पर मिलने वाला शहीद का दर्जा द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए सैनिक को नहीं दिया जा सकता है। ये अहम फैसला पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया।
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एक मामले में सैनिक की बेटियों की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह लाभ केवल तभी मिल सकता है, जब सरकार इस बारे में पॉलिसी बनाए। मामले में मोहाली निवासी दो बहनों की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि उनके पिता ब्रिटिश शासनकाल में सेना में थे।

इसी दौरान द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हुआ और इसमें उन्होंने ब्रिटिश इंडिया की ओर से भाग लिया और लड़ते-लड़ते वे शहीद हो गए। याची ने कहा कि भारत के लिए 1962, 1965 और 1971 युद्ध में शहीद होने वालों को जो दर्जा दिया जाता है, वही दर्जा उनके पिता को भी दिया जाए, क्योंकि उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया था। साथ ही शहीदों के परिजनों को जो लाभ दिए जाते हैं, वही लाभ उन्हें भी दिए जाएं।
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जमीन अलॉट किए जाने की याचिका भी खारिज की

court shimla
याची की ओर से पंजाब सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की गई कि भारत की तीन लड़ाइयों में शहीद होने वाले सैनिकों के परिजनों को दी 10 एकड़ जमीन की तर्ज पर उन्हें भी जमीन अलॉट की जाए। जस्टिस जैन ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पिता दूसरे विश्व युद्ध में शहीद हुए थे।

ऐसे में इस युद्ध में भारत गणराज्य के लिए नहीं बल्कि अंग्रेजी ताज के लिए शामिल हुए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़ने वालों को इससे पहले कहीं शहीद का दर्जा दिया गया हो इसका कोई रिकार्ड नहीं है और न ही सरकार की ऐसी कोई पॉलिसी है।

लिहाजा, न तो उनके पिता को शहीद माना जा सकता है और न ही शहीदों के आश्रितों को दिए जाने वाले लाभ याची को जारी किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक राज्य सरकार इस विषय में कोई नीति नहीं बनाती है, तब तक हाईकोर्ट इस विषय में किसी को कोई निर्देश नहीं दे सकता है।
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