भारत के लिए लड़ते हुए जान गंवाने पर मिलने वाला शहीद का दर्जा द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए सैनिक को नहीं दिया जा सकता है। ये अहम फैसला पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया।
एक मामले में सैनिक की बेटियों की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह लाभ केवल तभी मिल सकता है, जब सरकार इस बारे में पॉलिसी बनाए। मामले में मोहाली निवासी दो बहनों की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि उनके पिता ब्रिटिश शासनकाल में सेना में थे।
इसी दौरान द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हुआ और इसमें उन्होंने ब्रिटिश इंडिया की ओर से भाग लिया और लड़ते-लड़ते वे शहीद हो गए। याची ने कहा कि भारत के लिए 1962, 1965 और 1971 युद्ध में शहीद होने वालों को जो दर्जा दिया जाता है, वही दर्जा उनके पिता को भी दिया जाए, क्योंकि उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया था। साथ ही शहीदों के परिजनों को जो लाभ दिए जाते हैं, वही लाभ उन्हें भी दिए जाएं।