300 यूनिट मुफ्त बिजली के चुनावी वादों के बीच, पंजाब की जनता को आने वाले कई दशकों तक सस्ती बिजली मिलने की उम्मीद समाप्त हो चुकी है। पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में जहां निजी थर्मल पावर प्लांटों के साथ महंगे बिजली समझौते किए, वहीं इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार भी पीछे नहीं रही।
प्रदेश मे सोलर पावर (सूर्य की रोशनी से बिजली) खरीदने के लिए आठ रुपये से 17 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से समझौते किए गए हैं। जाहिर है, इस दाम पर खरीदी गई बिजली जब आम खपतकार तक पहुंचेगी तो उसे प्रति यूनिट बिजली पर 20 प्रतिशत बिजली कर, दो रुपये के बिजली ट्रांसमीशन से जुड़े खर्चे और गौ-सेस जैसे कई अन्य उपकर का भुगतान भी करना होगा।
यह सारा मामला उस समय खुलकर सामने आया जब कैप्टन के धुर विरोधी कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने बिजली की मौजूदा किल्लत के बीच अकाली-भाजपा पर ट्वीटर हमले शुरु किए तो सोलर पावर के खरीद समझौते भी चर्चा में आ गए। हालांकि सिद्धू ने शनिवार को अपने ट्वीट में बादल हस्ताक्षरित पीपीए थर्मल प्लांटों और बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा अक्षय ऊर्जा (सोलर पावर) मंत्री के रूप में 25 साल के लिए हस्ताक्षर किए पीपीए के आधार पर 5.97 रुपये से 17.91 रुपये प्रति यूनिट की दर से समझौते पर उंगली उठाते हुए लिखा कि यह जानते हुए कि सोलर उर्जा की लागत प्रति वर्ष 18 फीसदी की दर से घट रही है, उसके बावजूद महंगे समझौते किए गए। सिद्धू ने यह भी लिखा कि 2010 और आज इस बिजली की कीमत 1.99 रुपये प्रति यूनिट है।
सिद्धू ने हालांकि इस मामले में कैप्टन सरकार का कोई उल्लेख न करते हुए बचाव किया लेकिन विपक्षी दलों ने तुरंत ही पुराना रिकार्ड खंगाल डाला। इसके तहत कैप्टन सरकार ने भी बायोमास प्रोजैक्टों के साथ 8.10 रुपये प्रति यूनिट के महंगे समझौते किए। इससे पहले अकाली-भाजपा शासन के दौरान सोलर पावर खरीदने के लिए तीन निजी कंपनियों से 17.91 रुपये प्रति यूनिट की दर से समझौते किए गए। यह कंपनियां अडानी ग्रुप से जुड़ी हैं। कुल 91 प्रोजैक्टों के लिए समझौते किए गए जिनमें से 22 सोलर पावर प्रोजैक्टों में बिजली खरीद समझौता 8 रुपये प्रति यूनिट की दर से किया गया। खास बात यह भी है कि यह सभी समझौते अगले 25 साल के लिए किए गए हैं।