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मुफ्त की चीजें नहीं, युवा बोले- खुद को साबित करने का मिले मौका

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चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मुफ्त रेवड़ी बांटने के कल्चर के बयान पर ट्राइसिटी के युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि योजनाओं के सहारे गुजर बसर करने वाला व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ी को भी मुफ्त का चंदन घिसने के लिए प्रेरित करता है। चुनाव के दौरान बच्चे के जन्म से लेकर मरने तक की योजनाओं का बखान मंच से हो जाता है लेकिन यह उस बच्चे के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है। कुआं खोदने के बाद जो पानी निकलता है उसकी मिठास कुछ और ही होती है। देश के युवा को मुफ्त में जीने की आदत नहीं मेहनत और ईमानदारी के साथ खुद को साबित करने का मौका चाहिए। युवाओं ने कहा कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य को मजबूत कर दिया जाए, फिर रेवड़ी की तरह बंटने वाली योजनाओं की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए नेताओं को भी रोल मॉडल पेश करने के साथ वीआईपी कल्चर को खत्म करना होगा। कुछ युवाओं ने इन योजनाओं को बेहतर भी बताया। उन्होंने कहा कि यह एक बेहतर माध्यम है लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारने की लेकिन उसका लाभ लाभार्थी को मिल पाए, तब यह सफल है।
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बातचीत
फोटो वीणा जी के ट्रैक से
खुद को साबित करना चाहता है युवा
आज का युवा फ्री की चीजें नहीं चाहता है। उसे अपनी शैक्षिक योग्यता और कार्यकुशलता के आधार पर खुद को साबित करने का मौका मिलना चाहिए। हां इतना जरूर कहूंगा कि सबके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य मुहैया कराना सरकार का दायित्व है और यह देश के प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध होना चाहिए।
- डॉ राहुल चक्रवर्ती, पीजीआई
मुफ्तखोरी पर रोक लगनी चाहिए
मुफ्त बिजली, मुफ्त राशन और चुनाव में मुफ्त शराब इसके साथ ही राजनेताओं की पेंशन जैसी मुफ्तखोरी पर रोक लगनी चाहिए। देश के युवा को मुफ्त में जीने की आदत नहीं मेहनत और ईमानदारी के साथ खुद को साबित करने का मौका चाहिए। यह मुहैया कराना सरकार का पहला दायित्व है। देश को बेरोजगारी मुक्त बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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- डॉ. श्रेया केशरी, पीजीआई
असली हकदार को नहीं मिल रहा लाभ
सच कहा जाए तो मुफ्त की सेवा का जो असली हकदार है उस तक योजना का लाभ पहुंच ही नहीं रहा है। इसका मुख्य कारण भ्रष्टाचार ही है एक युवा होने के नाते हमें इस बात से सचेत रहना चाहिए कि चुनाव आते ही मुफ्त योजनाओं की घोषणा होने लगती हैं जो चुनाव पूरी होते ही कहीं विलुप्त हो जाती हैं इसलिए मुफ्तखोरी के गर्त में फंसने के बजाय हकीकत की दुनिया में जीना बेहद जरूरी है।
- डॉ. रिगजिन, पीजीआई
फोटो नीरज जी के ट्रैक पर
मुफ्त की रेवड़ियां देकर वोट बटोरने की परंपरा ठीक नहीं
वास्तव में हर चुनाव से पूर्व मुफ्त वाली राजनीतिक प्रलोभन की रेवड़ियां देकर वोट बटोरने की परंपरा ठीक नहीं है। हर वर्ग के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा को बराबर कर दिया जाए, फिर किसी भी तरह की योजनाओं की जरूरत नहीं होगी। आज के युवा को सिर्फ मौका मिलना चाहिए, वह मेहनत से अपनी मंजिल खुद तय लेगा।
- हर्षिका, बीएससी मेडिकल की छात्रा
आज भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी में जीने को मजबूर
भारत जैसे विकासशील देश में अभी भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने को मजबूर हैं। मुफ्त अथवा सब्सिडी वाली शिक्षा, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं और आवास में बांटी गई सुविधाओं ने उनके जीवन में संजीवनी का कार्य किया है। शिक्षा में निशुल्क निवेश को बढ़ावा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है।
- सौरभ शाह, एलएलबी की छात्र
गरीब बच्चों का बढ़ रहा मनोबल, जारी रहनी चाहिए योजना
ग्रामीण परिवेश और गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में मुफ्त में बांटी गई साइकिल और लैपटॉप जैसी कई चीजों ने छात्रों का मनोबल बढ़ाया है। उन्हें शिक्षा के लिए आधार प्रदान किया साथ ही उन्हें तकनीकी से जोड़ने में मदद की है। यह व्यवस्था जारी रहनी ही चाहिए।
- पूजा यादव, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की छात्रा
संजीव जी के ट्रैक पर फोटो
लालच देकर युवाओं को किया जा रहा भ्रमित
वोट के नाम पर निशुल्क योजनाओं का लालच देकर युवाओं को भ्रमित किया जा रहा है। इस बात को आज का पढ़ा लिखा वर्ग तो समझ रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी जागरूकता की जरूरत है क्योंकि वादे पांच साल तक सिर्फ कागजों में ही रहते हैं।
- रवि कुमार, तलवारबाज
वोट बैंक के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांटना गलत
आजकल सोशल नेटवर्किंग का जमाना है। हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल है इसलिए योजनाओं को धरातल पर लाया जा सकता है कि नहीं युवाओं को अच्छे से पता है। योजनाओं को रेवड़ी की तरह बांटना गलत है। जनता के पैसे का दुरुपयोग अपने वोट बैंक के लिए नहीं करना चाहिए।
- यामिनी गुप्ता, राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी
मूलभूत सुविधाएं मिले तो ऐसी योजनाओं की जरूरत नहीं
चुनावों के दौरान सौगात देने की घोषणाएं आमजन तक पहुंचती ही नहीं हैं। विदेशों की तर्ज पर सभी के लिए समान शिक्षा और समान स्वास्थ्य की सुविधा शुरू हो जाए तो कोई समस्या खत्म हो जाएगी। वास्तव में मूलभूत सुविधा लोगों तक पहुंच जाएं तो मुफ्त की योजनाओं की जरूरत ही नहीं है।
- विवेक, मार्शल आर्ट खिलाड़ी
फोटो कविता के ट्रैक पर
मुफ्तखोरी से युवाओं अपने को बचाएं
मुफ्तखोरों की वजह से देश में आर्थिक संकट बढ़ रहा है। मुफ्तखोरी का फायदा कुछ समय के लिए ही मिलता है। यह लोगों में आलसी की तरफ बझ़ाता है। खासकर युवाओं को इन सब से बचना चाहिए।
- सनी अहलावत, आर्ट्स छात्र
कर्म प्रधान देश में मुफ्तखोरी ने की घुसपैठ
कर्म ही पूजा मानने वाले देश में वोटों की राजनीति के चलते चुनावी वादों के रूप में मुफ्त में खाद्य सामग्री से लेकर दूसरी वस्तुएं बांटने का जो दौर चल गया है। ये साफ इशारा करता है कि इस देश का लोकतंत्र फ्री के लॉलीपॉप में फंस गया है। लोक लुभावन मुफ्त की योजनाओं से लोकतंत्र भी कमजोर होता है और अर्थतंत्र भी गड़बड़ा जाता है।
- तेगिंदर सिंह, कानून छात्र
सियासत का स्तर गिरा, मुफ्तखोरी हो रही हावी
देश की राजनीति में मुफ्तखोरी जमकर हावी होती जा रही है। इसके दूरगामी दुष्परिणाम होंगे। राजनितिक दल सत्ता में आने के लिए सियासत के स्तर को गिराने में लगे हैं। युवाओं को राजनेताओं की लोक लुभावन वादों में नहीं आना चाहिए।
- रजनी, कॉमर्स छात्र
पढ़ाई और शिक्षा ही हो मुफ्त
अगर देश का सही डेवलपमेंट करना है तो सरकारों को शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस करना चाहिए। आम लोगों को सिर्फ बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुफ्त में मिलनी चाहिए। इससे समाज के हर तबके के बच्चे को समान प्लेटफॉर्म मिल सके।
- पुनीत मसितां, कानून विद्यार्थी
25 वर्ष की उम्र तक मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिले
देश में 25 वर्ष की उम्र तक मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए। इससे युवा बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी भी कोई परेशानी नहीं आए। बेहतर शिक्षा मिलने के बाद युवाओं को अपनी जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए और सरकार को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करना चाहिए।
- अक्रम, इंजीनियरिंग छात्र
ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीति
सरकारों में देश में लोगों को मुफ्त में स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना चाहिए। इसके अलावा युवाओं को 22-25 वर्ष की उम्र तक मुफ्त में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। मुफ्त में बिजली या अन्य कोई सुविधाएं देने का लोगों को कोई फायदा नहीं है, ये सिर्फ वोट बैंक है।
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- निखिल, इंजीनियरिंग छात्र
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